सरसंघचालक मोहन भागवत, फोटो- सोशल मीडिया
Mohan Bhagwat Mumbai Speech: मुंबई में आयोजित ‘मुंबई व्याख्यानमाला’ के मंच से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने वो बात कह दी है, जिसकी गूंज पूरे देश के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में सुनाई दे रही है। संघ के 100 साल के सफर पर चर्चा करते हुए भागवत ने संगठन के सबसे शक्तिशाली पद ‘सरसंघचालक’ की नियुक्ति और जातिगत समीकरणों पर ऐसी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की है, जिसने विरोधियों और समर्थकों दोनों को हैरान कर दिया है।
मोहन भागवत ने दशकों से चली आ रही इस धारणा को सिरे से खारिज कर दिया कि संघ का प्रमुख केवल एक विशिष्ट जाति का व्यक्ति ही बन सकता है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि “ब्राह्मण होना कोई विशेष योग्यता नहीं है” और न ही अनुसूचित जाति या जनजाति होना इस पद के लिए कोई बाधा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ के सर्वोच्च पद तक पहुंचने के लिए केवल एक ही शर्त अनिवार्य है- वह व्यक्ति ‘हिंदू’ होना चाहिए। भागवत ने स्वीकार किया कि संघ की शुरुआत में ब्राह्मणों की संख्या अधिक थी, लेकिन अब संघ भौगोलिक और सामाजिक रूप से हर वर्ग तक पहुँच चुका है और यहाँ नियुक्तियाँ योग्यता और आवश्यकता के आधार पर होती हैं, न कि जाति के आधार पर।
अक्सर विपक्ष द्वारा लगाए जाने वाले आरोपों पर विराम लगाते हुए मोहन भागवत ने साफ किया कि “RSS सरकार नहीं चलाता है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि आरएसएस और भाजपा दो अलग-अलग इकाइयां हैं। उनके अनुसार, संघ का राजनीति से सीधा वास्ता नहीं है और इसका एकमात्र लक्ष्य समाज को एक सूत्र में पिरोना है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि स्वयंसेवक कहीं भी हों, लेकिन संगठन का काम केवल सामाजिक सेवा और राष्ट्र निर्माण तक ही सीमित है।
भाषा विवाद पर अपना पक्ष रखते हुए सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि संघ का अंग्रेजी भाषा से कोई व्यक्तिगत बैर नहीं है। जहां अनिवार्य हो, वहां इसका उपयोग किया जा सकता है, लेकिन अंग्रेजी कभी भी RSS का हिस्सा नहीं होगी। भागवत ने स्पष्ट किया कि संगठन का पूरा जोर मातृभाषा और हिंदी के प्रयोग पर रहेगा, क्योंकि ये भारतीय भाषाएं समाज को जोड़ने के लिए बहुत जरूरी हैं। उन्होंने भाषा विवाद को एक “स्थानीय बीमारी” बताया और इसे आपसी मेलजोल से दूर करने की सलाह दी।
संघ की फंडिंग को लेकर लोगों की जिज्ञासा शांत करते हुए भागवत ने बताया कि संगठन पूरी तरह से अपने स्वयंसेवकों के सहयोग से चलता है। उन्होंने एक दिलचस्प जानकारी दी कि यात्रा के दौरान कार्यकर्ता बाहर होटलों में खाने के बजाय स्वयंसेवकों के घर ठहरते हैं और उन्हीं के भोजन से काम चलाते हैं।
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इस खास कार्यक्रम में न केवल प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे, बल्कि बॉलीवुड का ग्लैमर भी देखने को मिला। ‘संघ के 100 साल’ के इस सत्र में अभिनेता जैकी श्रॉफ, फिल्म निर्देशक करण जौहर और अभिनेत्री अनन्या पांडे जैसी हस्तियां भी चर्चा का हिस्सा बनीं। भागवत ने अंत में अवैध प्रवासियों को पहचानने और उन्हें निर्वासित करने की अपील भी सरकार से की।