

Maharashtra Drought-Affected Talukas List: महाराष्ट्र सरकार ने खरीफ 2026 सीजन के दौरान बारिश की कमी और सूखे से जुड़े अन्य मानदंडों के आधार पर 'ट्रिगर-1' लागू होने के बाद, राज्य भर के 265 तालुकाओं में सूखा घोषित कर दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कई राहत उपाय व रियायतें लागू करने का फैसला किया है। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने घोषणा की कि राहत और पुनर्वास विभाग ने इस फैसले के संबंध में एक सरकारी आदेश जारी किया है।
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने आगे कहा कि सरकार सूखे से प्रभावित किसानों और ग्रामीण नागरिकों को अकेला नहीं छोड़ेगी। इस मुश्किल समय में वह मजबूती से किसानों के साथ खड़ी है। खरीफ सीजन के दौरान की स्थिति को देखते हुए इन 265 तालुकाओं में सूखा राहत उपाय लागू करने का फैसला किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बहुत जरूरी राहत देगा।
महाराष्ट्र में सूखे की घोषणा में 34 जिले शामिल हैं। प्रभावित क्षेत्र में विदर्भ, मराठवाड़ा, पश्चिमी महाराष्ट्र और उत्तरी महाराष्ट्र के बड़े हिस्से आते हैं। कोंकण के कुछ हिस्से भी इसमें शामिल हैं। इनमें बीड, लातूर, धाराशिव, नांदेड़, परभणी, हिंगोली, बुलढाणा, अमरावती, अकोला, वाशिम, यवतमाल, वर्धा, नागपुर, भंडारा, रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, नासिक, धुले, जलगांव, नंदुरबार, अहिल्यानगर, पुणे, सोलापुर, सांगली, सतारा, कोल्हापुर, छत्रपति संभाजीनगर, जालना, गोंदिया, चंद्रपुर और गढ़चिरोली जिलों की कुल 265 तालुका को शामिल किया गया है।
सबसे ज्यादा प्रभावित तालुका वाले जिलों में पुणे संभाग है। पुणे संभाग में 35 तालुकाएं प्रभावित हैं, जिससे यह राज्य के सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में से एक बन गया है। इसके यवतमाल (16), जलगांव (15), नांदेड़ (14), अमरावती (14), अहिल्यानगर (14), नागपुर (14), बुलढाणा (13), चंद्रपुर (12), सोलापुर (11), बीड (11), नासिक (10), लातूर (10) और छत्रपति संभाजीनगर (9) शामिल हैं।
भूमि राजस्व की माफी: सूखा प्रभावित क्षेत्रों में भूमि राजस्व पूरी तरह माफ कर दिया जाएगा।
फसल ऋण का पुनर्गठन: किसानों द्वारा लिए गए फसल ऋणों का पुनर्गठन किया जाएगा ताकि उन पर तुरंत भुगतान का दबाव न रहे।
ऋण वसूली पर रोक: कृषि संबंधी सभी प्रकार के सरकारी और बैंक ऋणों की वसूली पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।
बिजली बिल में छूट व कनेक्शन सुरक्षा: कृषि पंपों के बिजली बिलों में राहत दी जाएगी और सूखा प्रभावित गांवों में कृषि पंपों के बिजली कनेक्शन नहीं काटे जाएंगे।
छात्रों की परीक्षा फीस माफ: प्रभावित क्षेत्रों के स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की परीक्षा फीस माफ करने का निर्णय लिया गया है।
टैंकरों से जलापूर्ति व चारा व्यवस्था: पीने के पानी की किल्लत दूर करने के लिए टैंकर चलाए जाएंगे तथा मवेशियों के लिए पर्याप्त चारे का प्रबंध किया जाएगा।
रोजगार गारंटी योजना में ढील: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत अधिक से अधिक काम शुरू करने के लिए नियमों में छूट दी गई है।
अनाज की उपलब्धता: किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए मुफ्त या रियायती अनाज की गारंटी तय की जाएगी।
साथ ही, जल संरक्षण के काम शुरू करने और इंसानों व पशुओं के लिए पीने के पानी की आपूर्ति की योजना बनाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। सूखे से प्रभावित किसानों को फसल के नुकसान के लिए मदद की घोषणा तय प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद एक अलग सरकारी आदेश के जरिए की जाएगी।
डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार ने इस फैसले के लिए सीएम देवेंद्र फडणवीस और राहत एवं पुनर्वास विभाग का शुक्रिया अदा किया और जो देकर कहा कि सरकार सूखे से प्रभावित इलाकों में हालात पर लगातार नजर रख रही है।
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने कहा कि महायुति सरकार का उद्देश्य यह पक्का करना है कि सूखे की स्थिति में किसानों, खेत मजदूरों और ग्रामीण परिवारों को समय पर जरूरी मदद मिले। नुकसान का आकलन, फसल की निष्पक्ष जांच और उसके बाद राहत की प्रक्रियाओं में तेज़ी लाई जाएगी। डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार ने भरोसा जताया कि किसी भी हालत में किसानों को उनके हाल पर नहीं छोड़ा जाएगा।