मीठी नदी (सौ. सोशल मीडिया )
Mithi River Cleaning Delay: मानसून शुरू होने में लगभग ढाई महीने का समय बचा हुआ है, लेकिन मीठी नदी से गाद निकालने का काम अब तक शुरू नहीं किया गया है। इसका कारण यह है कि बीएमसी को नया ठेकेदार अब तक नहीं मिल पाया है।
बीएमसी ने मीठी नदी से गाद निकालने के लिए तीन चरणों में काम शुरू करने का फैसला किया है। इसके लिए टेंडर 28 फरवरी को निकाला गया, लेकिन 11 मार्च तक किसी भी ठेकेदार ने इसमें भाग नहीं लिया।
इसके बाद टेंडर को 17 मार्च तक आगे बढ़ाया गया, लेकिन इसके बाद भी कोई ठेकेदार आगे नहीं आया। अब एक बार फिर आखिरी बार टेंडर की तारीख बढ़ा कर 24 मार्च की गई है। बीएमसी के एक अधिकारी ने बताया कि अगर 24 मार्च तक कोई बोली नहीं लगती है, तब बीएमसी खुद ही मीठी नदी की सफाई करेगी।
बुधवार को स्टैंडिंग कमिटी में नगरसेवकों ने यह मुद्दा उठाया और बीएमसी प्रशासन से मीठी नदी साफ करने का प्लान जानने की कोशिश की। इस संदर्भ में बीएमसी की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में जमकर हंगामा हुआ।
नगरसेवकों ने प्वाइंट ऑफ ऑर्डर उठाते हुए प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए और चेतावनी दी कि यदि आगामी मानसून में शहर जलमग्न होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी बीएमसी प्रशासन की होगी। कांग्रेस के नगरसेवक अशरफ आजमी ने सवाल उठाया कि यदि ठेकेदार सामने नहीं आए, तो प्रशासन की वैकल्पिक योजना क्या है? उनके इस मुद्दे को अन्य नगरसेवकों का भी समर्थन मिला।
इस मुद्दे पर एमआईएम के नगरसेवक जमीर कुरैशी ने भी प्रशासन को घेरा और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और कहा कि मीठी नदी अब तीखी नदी हो गई है। उन्होंने कहा कि पहले इस परियोजना में गड़बड़ी हुई और अब जांच के डर से ठेकेदार आगे नहीं आ रहे हैं।
उन्होंने मांग की कि मानसून से पहले हर हाल में सफाई पूरी कराई जाए। वहीं, कांग्रेस की पार्षद डॉ। सईदा खान ने चेताया कि यदि समय रहते काम शुरू नहीं हुआ, तो 2005 जैसी स्थिति दोहराई जा सकती है।
बीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त अभिजीत बांगर ने बताया कि मानसून को देखते हुए नाला सफाई का काम शुरू हो गया है। सभी छोटे नालों की सफाई का काम वार्ड स्तर पर किया जा रहा है, वहीं बड़े नालों को 6 जोन में बांटा गया है। नालों की सफाई की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी और डैशबोर्ड लगाया जाएगा, सफाई करने की समयसीमा 31 मई तक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि समय रहते काम को पूरा किया जा सकेगा।
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