Thane Belapur Belt का मेगा प्रोजेक्ट रुका, विवाद के बीच रद्द हुआ स्लम रीडेवलपमेंट टेंडर
नवी मुंबई के Thane Belapur Belt में 338 एकड़ झुग्गी पुनर्विकास परियोजना का टेंडर MIDC ने विवादों के चलते रद्द कर दिया है। पारदर्शिता की कमी और विरोध के कारण प्रोजेक्ट फिलहाल ठप पड़ गया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
ठाणे बेलापुर इंडस्ट्रियल बेल्ट (सौ. सोशल मीडिया )
Thane Belapur Belt Tender Cancel: महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने आखिरकार ठाणे-बेलापुर इंडस्ट्रियल बेल्ट में 338 एकड़ कब्जे वाली झुग्गियों के रीडेवलपमेंट के लिए एक प्राइवेट डेवलपर का विवादित टेंडर रद्द कर दिया है।
जिसके चलते झोपडपट्टी पुनर्वसन योजना लटक गई है। दिघा-ऐरोली से शिरवणे तक फैली 35,800 झुग्गियों को इस प्रोजेक्ट के लिए योग्य माना गया था। टेंडर में विवादित शर्तों और प्रोजेक्ट को लागू करने में पूरी पारदर्शिता की कमी के कारण इसका विरोध हुआ था।
वन मंत्री गणेश नाईक ने इसके खिलाफ आंदोलन करने की धमकी दी थी, इस परियोजना को लागू करने से पहले, टेंडर में एक बड़ी शर्त यह रखी गई थी कि इसके लिए सिर्फ उसी डेवलपर को चुना जाएगा जो 1900 से ज्यादा परिवारों को फिर से बसाने की क्षमता रखता हो।
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एमआईडीसी ने नहीं किया था कोई अध्ययन
यह भी दावा किया गया था कि यह प्रोजेक्ट, जो ठाणे-बेलापुर बेल्ट में दिघा से शिरवणे तक तीन हिस्सों में लागू किया जाएगा, धारावी रीडेवलपमेंट के बाद सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होगा, जिसके बाद नवी मुंबई की राजनीति में और सामाजिक क्षेत्र में इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई थी।
इस प्रोजेक्ट के चलते नवी मुंबई के औद्योगिक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य होने वाला था, जिससे एक नया शहर बनता। अगर Thane Belapur Belt में 338 एकड़ की बड़ी जमीन को स्लम रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए डेवलप किया जा रहा है, लेकिन एमआईडीसी ने इस बारे में कोई अध्ययन नहीं किया था कि इससे नवी मुंबई शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर पर कितना और कैसे असर पड़ेगा। साथ ही, इस योजना को लागू करते समय 2013 तक की झुग्गियों को माना जाने वाला था। ‘एमआईडीसी’ ने इस बात का कोई जिक्र नहीं दिया था कि यह क्राइटेरिया किस बेसिस पर तय किया गया था।
इस बारे में टेंडर कैसिल कर दिए गए हैं। आगे की बातचीत, सभी को विश्वास में लेकर और लाभार्थियों के साथ बातचीत के बाद आगे के फैसले लिए जाएंगे।
– पी वेलारासू, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एमआईडीसी
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Navi Mumbai मनपा ने भी जताया था एतराज
स्थानीय लोगों को इस बारे में जब जानकारी मिली तो नवी मुंबई के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की गयी थी। वन मंत्री गणेश नाईक ने इस प्रोजेक्ट का सबके सामने विरोध किया था और कहा था कि ‘इस प्रोजेक्ट को डेवलप करते समय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को अंधेरे में रखा जा रहा है’, वन मंत्री गणेश नाईक ने इस संदर्भ में मुख्यमंत्री को एक लेटर दिया था, जिसमे कहा गया था कि यह प्रोजेक्ट लोकल लोगों को अंधेरे में रखकर डेवलप किया जा रहा है। मनपा ने भी इस प्रोजेक्ट पर एतराज जताया था। आखिर में, एमआईडीसी ने इस बारे में जारी टेंडर कैसिल करने का फैसला किया है।
