मौलाना साजिद राशिदी (सौ. नवभारत )
Maulana Sajid Rashidi Statement: ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने एआईएमआईएम नेता वारिस पठान के महाराष्ट्र और देश को “हरे रंग” में बदलने वाले बयान का समर्थन किया है।
उन्होंने कहा कि अगर कोई राजनीतिक दल अपने संगठन के विस्तार की बात करता है, तो इसे विवाद का मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। आईएएनएस से बातचीत में मौलाना साजिद ने सवाल उठाया कि हरे रंग को लेकर ही आपत्ति क्यों जताई जाती है, जबकि भगवा झंडा फहराने और धार्मिक नारे लगाने की खुली बातें अक्सर सामान्य मान ली जाती हैं।
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि नफरत फैलाने वाले कई बयानों पर चुप्पी साध ली जाती है, लेकिन जब मुसलमानों से जुड़ा कोई बयान आता है तो उस पर तुरंत विवाद खड़ा कर दिया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हरा रंग किसी एक धर्म का प्रतीक नहीं है और इसे इस्लाम से जोड़कर बदनाम करने की कोशिश की जाती है।
यूजीसी के नए नियमों को लेकर चल रहे विरोध पर मौलाना साजिद ने कहा कि ऐसे कानूनों का दुरुपयोग होने की आशंका हमेशा बनी रहती है। इससे निर्दोष लोगों के फँसने का खतरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे संवेदनशील कानून बनाते समय पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए, क्योंकि इसका सामाजिक और राजनीतिक असर भी पड़ सकता है।
शंकराचार्य के अपमान के विरोध में एक अधिकारी के इस्तीफे के मामले पर उन्होंने कहा कि इस आधार पर इस्तीफा देना उचित नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि जब अधिकांश संत संगम स्नान के दौरान पालकी का प्रयोग नहीं करते, तो शंकराचार्य द्वारा ऐसा क्यों किया गया। हालांकि, उन्होंने कुछ संतों के साथ पुलिस के व्यवहार को गलत भी बताया।
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मुस्लिम वोट को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि मुसलमान किसी एक पार्टी के बंधक नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रह गई है, जबकि मुसलमान अपने मुद्दों को लेकर विकल्प तलाश रहे हैं। उनके अनुसार, आज मुसलमान पूरी तरह स्वतंत्र हैं और अपने फैसले खुद लेने में सक्षम हैं।