Maharashtra Auto Taxi Marathi Rule: मुंबई में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए व्यावहारिक मराठी का ज्ञान अनिवार्य किए जा चुके हैं। हालांकि, अभी भी बड़ी संख्या में चालक मराठी का व्यवहारिक ज्ञान नहीं सीख सके हैं। ऐसे में संशोधित नियमों को लागू करने के तरीके पर बुधवार को परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक होगी।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में चालकों के मराठी ज्ञान की जांच, उसकी प्रक्रिया और पर्याप्त मराठी ज्ञान नहीं रखने वाले चालकों के खिलाफ आगे की कार्रवाई के साथ ही गाइडलाइन पर चर्चा होगी।
राज्य में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी वर्ग के कुल 9 लाख 78 हजार 541 वैध परमिट हैं। इनमें 9 लाख 16 हजार 884 ऑटो-रिक्शा और 61 हजार 657 टैक्सी परमिट शामिल हैं। अकेले मुंबई महानगर क्षेत्र में करीब 4 लाख 62 हजार 387 रिक्शा टैक्सी परमिट धारक हैं। व्यावसायिक वाहन चालक रोजाना हजारों यात्रियों के सीधे संपर्क में आते हैं। इसलिए यात्रियों से संवाद के लिए चालकों को व्यावहारिक मराठी का ज्ञान होना जरूरी है। परिवहन विभाग ने 12 अगस्त 2026 को संशोधित नियम लागू किए हैं। इनके प्रभावी अमल की दिशा आज की बैठक में तय की जाएगी।
परिवहन विभाग की पहल पर पिछले साढ़े तीन महीने से 'हिंदुहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे मराठी संवाद पाठ्यक्रम' अभियान चलाया गया। इसमें अब तक 1 लाख 65 हजार से अधिक चालकों ने भाग लिया है। इससे कई चालकों को यात्रियों से मराठी में संवाद करने का आत्मविश्वास मिला है।
यूनियन के आंकड़ों के मुताबिक, महामुंबई में करीब 5.5 लाख रिक्शा-टैक्सी चालक है, जबकि पूरे महाराष्ट्र में यह संख्या 15 लाख से अधिक है। इनमें 60 से 70 फीसदी चालक गैर-मराठी भाषी हैं। प्रत्येक चालक को मराठी सीखने में कम से कम 3 से 4 सप्ताह लगते है। शुरुआत में कई चालकों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, पर अंतिम तारीख नजदीक आने पर प्रशिक्षण के लिए भीड़ बढ़ गई।
9.78 लाख से अधिक परमिट धारकों में 1.65 लाख से ज्यादा चालक अभियान में शामिल हुए है। शेष चालकों को मराठी सीखने के लिए आगे भी अवसर और सहयोग दिया जाएगा। साथ ही आज की बैठक में मराठी ज्ञान की जांच, मानदंड और नियमों का पालन नहीं करने वालों पर कार्रवाई की गाइडलाइन तय की जाएगी।
परिवहन विभाग की पहल पर 105 दिनों तक चला 'मराठी सीखें' अभियान हाल ही में समाप्त हुआ। हालांकि, मराठी सीखने के इच्छुक चालकों को भाषा विभाग के माध्यम से आगे भी सहयोग दिया जाएगा।