मनोज जरांगे ने दोनों गठबंधनों को नकारा, महापालिका चुनाव में किसी को चुनावी समर्थन नहीं
Manoj Jarange Patil: मराठा आरक्षण आंदोलनकारी मनोज जरांगे-पाटील ने साफ किया कि वे महापालिका चुनाव में महायुति या महाविकास आघाड़ी किसी को भी समर्थन नहीं दे रहे हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे
मराठा आरक्षण आंदोलनकारी मनोज जरांगे-पाटील (सोर्सः सोशल मीडिया)
Municipal Elections Maharashtra: मुंबई सहित राज्य की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव से कुछ ही घंटे पहले मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे-पाटील ने अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वे महायुति (भाजपा-शिवसेना) या महाविकास आघाड़ी (कांग्रेस-शिवसेना) में से किसी भी गठबंधन को इस चुनाव में समर्थन नहीं दे रहे हैं।
जरांगे का यह बयान ऐसे समय आया है, जब हाल के दिनों में उनके नाम से जारी कुछ पर्चों और वायरल वीडियो के कारण राजनीतिक समर्थन को लेकर अफवाहें फैली थीं। इन अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, “महायुति हो या महाविकास आघाड़ी-महापालिका चुनाव में किसी को भी मेरा समर्थन नहीं है। मेरे पुराने वीडियो वायरल किए जा रहे हैं, जो भ्रामक हैं।”
आंदोलन या संगठन से कोई संबंध नहीं
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके नाम से प्रसारित किए जा रहे किसी भी पर्चे या संदेश पर विश्वास न किया जाए। मनोज जरांगे ने आगे कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर किसी व्यक्ति ने किसी उम्मीदवार का समर्थन किया है, तो वह उसका निजी निर्णय है और उसका उनके आंदोलन या संगठन से कोई संबंध नहीं है।
सम्बंधित ख़बरें
ठाकरे सेना को एक और तगड़ा झटका? हिंगोली के सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर पहुंचे शिंदे के ‘नंदनवन’ आवास
NCP को लगेगा अब तक का सबसे बड़ा झटका? भाजपा में शामिल होंगे 40 लोग, कांग्रेस के बयान से मचा हड़कंप
खामगांव में जल संकट की आशंका, प्रशासन अलर्ट, नागरिकों से पानी बचाने की अपील
मुंबई के 79 पार्षदों की कुर्सी खतरे में? चुनाव को अदालत में चुनौती, RTI के इस बड़े खुलासे से मचा हड़कंप
मराठा आरक्षण विरोधियों को न दें वोट
भले ही जरांगे ने किसी राजनीतिक दल को औपचारिक समर्थन देने से इनकार किया हो, लेकिन उन्होंने मराठा समाज से स्पष्ट अपील की है। उन्होंने कहा,
“हम किसी को समर्थन नहीं दे रहे हैं, लेकिन जो उम्मीदवार मराठा समाज और मराठा आरक्षण के विरोधी हैं, उन्हें मराठा समाज का समर्थन नहीं मिलना चाहिए।”
ये भी पढ़े: 4 विधायकों सहित दिग्गज उम्मीदवारों को पुलिस सुरक्षा, नासिक पुलिस आयुक्त का बड़ा फैसला
चुनावी राजनीति में प्रभाव
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे मनोज जरांगे का यह तटस्थ रुख चुनावी राजनीति में अहम माना जा रहा है। चुनावों से ठीक पहले उनका यह संदेश राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण संकेत है, जो मराठा मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका रुख यह दर्शाता है कि वे किसी गठबंधन के साथ नहीं, बल्कि मराठा समाज के हितों के साथ खड़े हैं।
