Maharashtra: शीतकालीन सत्र से पहले विपक्ष नेता पद पर घमासान, उद्धव ने सरकार पर निशाना साधा
Maharashtra शीतकालीन सत्र से पहले दोनों सदनों में नेता विपक्ष का पद खाली है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि महायुति सरकार एलओपी से डर रही है, जबकि भास्कर जाधव के नाम पर अब तक निर्णय लंबित है।
- Written By: अपूर्वा नायक
नागपुर शीत सत्र (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai News In Hindi: बीजेपी, शिवसेना (शिंदे गुट) और राकां (अजीत पवार) के गठबंधन वाली महायुति सरकार 2।0 का शीतकालीन सत्र सोमवार से नागपुर में शुरू होनेवाला है।
राज्य के इतिहास में पहली बार विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों में आधिकारिक रूप से कोई नेता प्रतिपक्ष मौजूद नहीं होगा। इस बीच शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि राज्य सरकार ने सभी लोकतांत्रिक मूल्यों को खत्म कर दिया है।
वैसे तो उसने नेता विपक्ष का पद दे देना चाहिए अन्यथा हिम्मत हो तो उपमुख्यमंत्री पद भी निरस्त कर देना चाहिए, 2024 के विस चुनाव में विपक्षी दलों को पर्याप्त संख्या में सीटें नहीं मिलने के कारण यह नौबत आई है। वहीं विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष रहे अंबादास दानवे के विधान परिषद सदस्य पद का कार्यकाल खत्म हो जाना, इस असाधारण स्थिति के। पीछे मुख्य कारण हैं।
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नेता विपक्ष पद से क्यों डर रही सरकार
उद्धव ने कहा कि सरकार के गठन को एक साल हो गया है। इतिहास में शायद ऐसा पहली बार हुआ है, जब विधानमंडल के दोनों सदनों में विपक्ष के नेता का पद खाली है, दिल्ली के समर्थन के बावजूद सरकार विपक्ष के नेता के पद से क्यों डर रही है? यदि आप हमें कानून दिखाते हैं तो डीसीएम का पद भी तुरंत खत्म करना चाहिए, क्योंकि संविधान में कहीं भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
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भास्कर जाधव ने दिया है आवेदन
गत वर्ष विस सचिवालय ने यूबीटी को दिए जवाब में कहा था कि विपक्ष के नेता पद के लिए 10% विधायकों वाला कोई घोषित नियम नहीं है। इसलिए विपक्ष में सबसे बड़ी पार्टी तथा विपक्ष के 49 विधायकी के प्रतिनिधि के रूप में शिवसेना (यूबीटी) की ओर से भास्कर जाधव को विपक्ष कर नेता बनाए जाने के संबंध में पिछले बजट सत्र के दौरान दिस अधाश राहुल नार्वेकर को आवेदन दिया गया था लेकिन उस पर मानसून सत्र तक भी कोई निर्णय नहीं हो सका था। जबकि मानसून सत्र के उपरांत विधान परिषद में एलओपी रहे अंबादास दानवे का कार्यकाल भी खत्म हो गया।
