Mumbai-Pune में जल्द बनेगी टैक्सी व बसों की पार्किंग, परिवहन विभाग ने दी सिफारिशें
Maharashtra की नई पार्किंग नीति में रिक्शा, टैक्सी, बस और स्कूल वाहनों के लिए अलग पार्किंग की व्यवस्था होगी। ट्रैफिक जाम कम करने और स्मार्ट पार्किंग सिस्टम लागू करने की योजना तैयार की जा रही है।
- Written By: अपूर्वा नायक
टैक्सी और बस पार्किंग सुविधा (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai News In Hindi: राज्य परिवहन विभाग की ओर से तैयार की जा रही नई पार्किंग नीति में अब रिक्शा, टैक्सी, यात्री और स्कूल बस जैसे सार्वजनिक वाहनों के लिए अलग से पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी।
इस संदर्भ में परिवहन विभाग ने नगर विकास विभाग को प्रस्ताव दिया है कि भविष्य के शहरी विकास प्लान में ऐसी पार्किंग को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। परिवहन विभाग ने शहरों में उपलब्ध पार्किंग स्थलों का सर्वे करने और उससे जुड़ी कानूनी दिक्कतों का अध्ययन करने के लिए अप्रैल महीने में क्रिजिल कंपनी की नियुक्ति की थी।
कंपनी ने जुलाई में सौंपी गई अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में शहरी विकास योजनाओं में मौजूद पार्किंग नीति की गंभीर खामियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। रिपोर्ट में कहा गया कि जहां निजी वाहनों के लिए पार्किंग का प्रावधान है। वहीं सार्वजनिक वाहनों के लिए समर्पित पार्किंग का घोर अभाव है।
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सड़कों के किनारे पार्किंग से बढ़ती जाम की समस्या
मुंबई और पुणे जैसे महानगरों में टेंपो और ट्रकों के लिए तो कुछ टर्मिनल हैं, लेकिन रिक्शा, टैक्सी और बसों के लिए स्वतंत्र पार्किंग का मुद्दा गंभीर बनता जा रहा है। इसके चलते बड़ी संख्या में वाहन सड़कों के किनारे खड़े किए जाते हैं, जिससे ट्रैफिक जाम की समस्या सीधे तौर पर बढ़ती है।
सार्वजनिक सुविधाओं की तरह पार्किंग भी आवश्यक
कुछ सप्ताह पहले परिवहन विभाग ने राज्य के विभिन्न महानगर पालिकाओं, प्राधिकरणों और शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की थी। बैठक में अधिकारियों ने कहा कि जिस प्रकार स्कूल, उद्यान, अस्पताल और बाजारों के लिए योजना बनाई जाती है, उसी तरह सार्वजनिक परिवहन वाहनों के लिए भी पार्किंग स्थल निर्धारित करना अत्यंत आवश्यक है। यह पार्किंग सुविधा मुफ्त या सशुल्क रखनी है। इसका निर्णय सरकार या स्थानीय स्वराज संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र में होगा।
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कानूनी अड़चनों पर अध्ययन
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पार्किंग नीति से संबंधित कई कानूनी मामले फिलहाल न्यायालय में लंबित हैं। इसलिए नई नीति बनाते समय इन मामलों का गहराई से अध्ययन किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का कोई न्यायिक अड़चन न आए। भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार पार्किंग की आवश्यकताएं अलग-अलग होती हैं।
उदाहरण के लिए, मुंबई जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में वर्टिकल या मल्टीलेवल पार्किंग जैसे विकल्पों पर विचार किया जाएगा। साथ ही तकनीक के माध्यम से ‘स्मार्ट पार्किंग’ प्रणाली, मोबाइल ऐप द्वारा उपलब्ध पार्किंग जानकारी और ऑनलाइन बुकिंग जैसी आधुनिक सुविधाओं को भी शामिल किए जाने की संभावना है।
-मुंबई से अभिषेक पाठक की रिपोर्ट
