शिंदे गुट का मिशन विधान परिषद, नीलम गोऱ्हे पर फिर भरोसा या दिखेगा कोई नया चेहरा?
Maharashtra Vidhan Parishad Election: महाराष्ट्र विधान परिषद की 10 सीटों के लिए 12 मई को होने वाले चुनाव को लेकर शिंदे गुट में बड़ी रणनीति तैयार हो रही है, नीलम गोऱ्हे को फिर मौका मिलने की चर्चा।
- Written By: गोरक्ष पोफली
एकनाथ शिंदे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Vidhan Parishad Election News: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर विधान परिषद (Vidhan Parishad) के चुनावों ने हलचल बढ़ा दी है। 10 रिक्त सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव की तारीख 12 मई तय की गई है, जिसके लिए सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा और उसी शाम नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। इस चुनावी समर के बीच उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट में उम्मीदवारी को लेकर बैठकों का दौर शुरू हो गया है।
नीलम गोऱ्हे की दावेदारी मजबूत
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोऱ्हे का कार्यकाल समाप्त होने के बाद, पार्टी उन्हें फिर से मौका दे सकती है। शिंदे गुट उन्हें एक अनुभवी और विश्वसनीय चेहरे के रूप में देख रहा है। सूत्रों की मानें तो पार्टी में स्थिरता बनाए रखने के लिए पहली सीट पर नीलम गोऱ्हे का नाम लगभग निश्चित माना जा रहा है।
दूसरी सीट के लिए मची होड़
पहली सीट के लिए जहां स्थिति स्पष्ट दिख रही है, वहीं दूसरी सीट के लिए उम्मीदवारों की लंबी फेहरिस्त ने शिंदे के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। इस सीट के लिए रवींद्र फाटक, संजय मोरे, किरण पावसकर, शीतल म्हात्रे, शाइना एनसी और दीपक सावंत जैसे दिग्गजों के नाम चर्चा में हैं। पार्टी के भीतर इस होड़ ने मुकाबला काफी दिलचस्प बना दिया है।
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क्या फिर चलेगा ‘धक्कातंत्र’?
हाल ही में राज्यसभा चुनाव में एक सामान्य कार्यकर्ता को मौका देकर एकनाथ शिंदे ने सबको चौंका दिया था। अब चर्चा यह है कि क्या विधान परिषद में भी वही ‘ धक्कातंत्र दोहराया जाएगा? राजनीतिक पंडितों का मानना है कि शिंदे किसी नए चेहरे को मौका देकर कार्यकर्ताओं को बड़ा संदेश दे सकते हैं।
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मंत्रिमंडल में बदलाव के संकेत
चुनावों के साथ-साथ शिंदे गुट में बदलाव की चर्चा भी जोरों पर है। कुछ मंत्रियों के कामकाज से नाराजगी और धाराशिव व सोलापुर जैसे जिलों में कार्यकर्ताओं के बढ़ते असंतोष को देखते हुए मंत्रियों की छुट्टी की जा सकती है।विधायकों की शिकायत है कि उनके क्षेत्रों में काम नहीं हो रहे हैं, जिससे मंत्रियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए शिंदे गुट में होने वाले ये आंतरिक बदलाव भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे।
