मुंबई में आयोजित महाराष्ट्र स्ट्रोक समिट 2026 में उपस्थित अतिथि (सोर्स: सोशल मीडिया)
Ayushman Bharat Stroke Treatment: महाराष्ट्र में बढ़ते स्ट्रोक के मामलों को देखते हुए राज्य में बेहतर और समय पर उपचार की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया। इसी उद्देश्य से इंडियन मेडिकल पार्लियामेंटेरियन्स फोरम (IMPF) ने यूरोपियन बिज़नेस ग्रुप के सहयोग से और मेडट्रॉनिक को नॉलेज पार्टनर के रूप में साथ लेकर महाराष्ट्र स्ट्रोक समिट का आयोजन किया।
भारत में स्ट्रोक, मृत्यु का चौथा और विकलांगता का पांचवां सबसे बड़ा कारण है। महाराष्ट्र की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि यह देश के उन शीर्ष 10 राज्यों में शामिल है जहां स्ट्रोक के कारण मौत और विकलांगता के सबसे अधिक मामले सामने आते हैं। ये आंकड़े स्ट्रोक के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने, समय पर जांच करने और क्रिटिकल केयर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता को दर्शाते हैं, ताकि मरीजों को तुरंत और प्रभावी इलाज मिल सके।
सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से स्ट्रोक के उपचार में तकनीकी प्रगति तो हुई है, लेकिन कई बड़ी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। भारत में अक्सर स्ट्रोक के मरीज अस्पताल पहुंचने में बहुत देर कर देते हैं, जिसका मुख्य कारण चेतावनी संकेतों के प्रति जागरूकता की कमी है। इसके अलावा, स्ट्रोक के लिए प्रशिक्षित डॉक्टरों और सुविधाओं की कमी, प्रमाणित उपचार पद्धतियों का सीमित उपयोग और इलाज की ऊंची लागत भी कई परिवारों के लिए बेहतर उपचार को पहुंच से बाहर कर देती है।
समिट के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। केईएम अस्पताल की डीन डॉ. संगीता रावत ने ‘भारत में स्ट्रोक प्रबंधन से जुड़े क्लिनिकल प्रमाण’ (ICMR और PRAAN अध्ययन) पर अपनी बात रखी। वहीं, केईएम अस्पताल के प्रोफेसर और यूनिट हेड डॉ. नितिन एन. डांगे ने ‘MJPJAY योजना के तहत स्ट्रोक उपचार को शामिल करने के प्रभाव और आवश्यक सहयोग’ विषय पर चर्चा की।
फोरम का मुख्य उद्देश्य स्ट्रोक उपचार व्यवस्था में मौजूद कमियों का गंभीरता से विश्लेषण करना और उनके स्थायी समाधान खोजना था। चर्चा के प्रमुख बिंदुओं में स्ट्रोक केंद्रों की स्थापना और उन्हें मजबूत करने के रणनीतिक तरीके शामिल रहे, ताकि मरीजों को समय पर, प्रभावी और समान रूप से उच्च गुणवत्ता वाला उपचार मिल सके।
इस अवसर पर महाराष्ट्र सरकार के सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री प्रकाशराव आबिटकर ने कहा कि स्ट्रोक केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में मृत्यु और दीर्घकालिक विकलांगता का एक प्रमुख कारण बना हुआ है। इसके गहरे सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक-आर्थिक प्रभाव को देखते हुए, भारत सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के तहत व्यापक स्ट्रोक उपचार पैकेज शामिल करके एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। इन पैकेजों में थ्रोम्बोलाइसिस, समर्पित स्ट्रोक केयर यूनिट में उपचार और मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी जैसी महत्वपूर्ण चिकित्सा सेवाएं शामिल हैं।
मंत्री प्रकाश आबिटकर ने कहा कि यह पहल देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर है। उन्नत और समय-बद्ध स्ट्रोक उपचार तक पहुंच बढ़ाकर और मरीजों व उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ कम करके, यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं में समानता और किफायती उपचार के हमारे संकल्प को और मजबूत करती है।
राज्यसभा सदस्य और इंडियन मेडिकल पार्लियामेंटेरियन्स फोरम के अध्यक्ष डॉ. अनिल बोंडे ने कहा कि महाराष्ट्र स्ट्रोक समिट हमारे राज्य में अधिक तत्पर और न्यायसंगत स्ट्रोक उपचार व्यवस्था बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्ट्रोक आज भारत की सबसे गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक बन चुका है। खासकर मुंबई जैसे शहरी केंद्रों में इसके बढ़ते बोझ को देखते हुए हमें तुरंत, समन्वित और व्यवस्थित कार्रवाई करने की जरूरत है। हालांकि तकनीक और चिकित्सा क्षमताओं में प्रगति उत्साहजनक है, लेकिन हमें मिलकर उन बाधाओं को दूर करना होगा जो अब भी बनी हुई हैं।
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डॉ. अनिल बोंडे ने कहा कि हमें ऐसे स्थायी और विस्तार-योग्य समाधान विकसित करने पर ध्यान देना होगा जो ‘स्ट्रोक-रेडी’ नेटवर्क को मजबूत करें, समय पर मिलने वाले उपचार तक पहुंच बढ़ाएं और यह सुनिश्चित करें कि हर मरीज चाहे वह किसी भी क्षेत्र या आर्थिक पृष्ठभूमि से हो उसे समय पर और उच्च गुणवत्ता वाला उपचार मिल सके।
मेडट्रॉनिक इंडिया में न्यूरोसाइंस और स्पेशलिटी थैरेपीज़ के सीनियर डायरेक्टर प्रतीक तिवारी ने कहा कि सार्वजनिक-निजी साझेदारी (PPP) महाराष्ट्र में स्ट्रोक प्रबंधन को आगे बढ़ाने का एक प्रभावी और टिकाऊ मॉडल साबित हो सकती है। इसके माध्यम से जागरूकता बढ़ाने, कम से कम समय में उपचार सुनिश्चित करने, उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने और आधुनिक तकनीक का बेहतर उपयोग करने में मदद मिलेगी। इस तरह की साझेदारियां राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर स्ट्रोक उपचार व्यवस्था को काफी मजबूत बना सकती हैं। ये प्रयास मरीजों के लिए सर्वोत्तम परिणाम सुनिश्चित करने और स्ट्रोक देखभाल की समग्र गुणवत्ता को बढ़ाने में बेहद मददगार साबित होंगे।