महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra ST Mahamandal Land Development: महाराष्ट्र में एसटी महामंडल के स्वामित्व वाली करीब 1,500 हेक्टेयर जमीन का विकास कर राजस्व बढ़ाने की योजना बनाई गई है। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने गुरुवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इन अतिरिक्त और खाली पड़ी जमीनों का प्रभावी उपयोग कर न केवल महामंडल की आय बढ़ाई जाएगी, बल्कि यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा किए जाएंगे।
मंत्री प्रताप सरनाईक ने बताया कि इस संबंध में महाराष्ट्र विधान परिषद में आधे घंटे की चर्चा के दौरान सरकार ने विस्तृत जानकारी सदन में प्रस्तुत की। उनके अनुसार राज्य परिवहन महामंडल के पास राज्यभर के विभिन्न डिपो और बस स्टेशनों के परिसर में लगभग 1,500 हेक्टेयर से अधिक जमीन उपलब्ध है। इन जमीनों का योजनाबद्ध विकास कर राजस्व बढ़ाने के लिए सरकार ने इन्हें सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत निजी डेवलपर्स को देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत इन स्थानों का पुनर्विकास 98 वर्ष के लीज समझौते पर किया जाएगा।
राज्य में फिलहाल एसटी महामंडल के 251 डिपो और 581 बस स्टेशन संचालित हो रहे हैं। इनमें से करीब 482 स्थानों पर लगभग 2,360 हेक्टेयर जमीन विकास के लिए उपलब्ध पाई गई है। वर्ष 2017 में इन जमीनों के विकास के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन अपेक्षित प्रतिसाद न मिलने के कारण वह आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद उच्चाधिकार समिति की सिफारिशों के आधार पर नई नीति तैयार की गई है और अब प्रमुख स्थानों के लिए फिर से निविदा प्रक्रिया शुरू की गई है।
पहले चरण में मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई और पुणे जैसे प्रमुख शहरों में एसटी की जमीनों का चरणबद्ध विकास किया जाएगा। यहां बस स्टेशनों का आधुनिकीकरण, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, कार्यालयीन इमारतें और यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है। सरकार ने संशोधित नीति के तहत लीज अवधि 30 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष करने का निर्णय लिया है। वहीं व्यावसायिक परियोजनाओं के लिए 49+49 वर्ष यानी कुल 98 वर्ष तक का लीज प्रावधान रखा गया है, ताकि निवेशकों को प्रोत्साहन मिल सके और एस।टी। महामंडल को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ प्राप्त हो।
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इस परियोजना के लिए विशेषज्ञ प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सलाहकारों का पैनल बनाया गया है, जिनके मार्गदर्शन में प्रस्तावित जमीनों के ‘क्लस्टर पैकेज’ तैयार किए जा रहे हैं। आर्थिक व्यवहार्यता के आधार पर जिला, तालुका और गांव स्तर की ‘ए’, ‘बी’ और ‘सी’ श्रेणी की जमीनों को शामिल करते हुए पहले चरण में 72 परियोजनाओं के जरिए 216 स्थानों का विकास पीपीपी मॉडल पर करने का प्रस्ताव है।