Maharashtra School Bus Fee Hike: नए शैक्षणिक सत्र से स्कूल बस शुल्क में 15% बढ़ोतरी, अभिभावकों पर बढ़ेगा बोझ
Maharashtra School Bus Fee Hike: नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से स्कूल बस परिवहन शुल्क में 15 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। बढ़ती परिचालन लागत और ईंधन खर्च का असर अब अभिभावकों की जेब पर भी पड़ने लगा है।
- Written By: अपूर्वा नायक
Maharashtra School Bus Fee Hike (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम) फाइल फोटो
Maharashtra School Bus Fee Hike News: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और उससे उपजे वैश्विक ईंधन संकट का असर अब आम लोगों की जेब पर पड़ने लगा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और परिवहन क्षेत्र की बढ़ती लागत ने अब स्कूली शिक्षा से जुड़े खर्चों पर भी असर डालना शुरू कर दिया है।
महाराष्ट्र में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत से ठीक पहले स्कूल बस परिवहन शुल्क में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा कर दी गई है। इस शुल्क वृद्धि ने पैरेंट्स पर महंगाई का बोझ लाद दिया है। बस संचालकों का कहना है कि विभिन्न खर्चों में लगातार हो रही वृद्धि के कारण यह फैसला लेना पड़ा।
इस निर्णय से लाखों अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ने वाला है, जिन्हें पहले से ही स्कूल फीस, किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक खचों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में बच्चों का स्कूल पहुंचना अब पहले के मुकाबले और महंगा हो जाएगा।
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महाराष्ट्र स्कूल बस ओनर्स एसोसिएशन के अनुसार राज्य बावजूद कोई सहायता नहीं मिली। बढ़ती सरकार को बार-बार ज्ञापन देने के लागत को देखते हुए शुल्क बढ़ाने का निर्णय लेना पड़ा है, यह नई शुल्क वृद्धि शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से लागू होगी।
संघ ने अभिभावकों और स्कूलों से सहयोग की अपील की है। एसोसिएशन ने इस निर्णय के बाद एक बयान जारी करते हुए कहा है कि स्कूल बस चालक मालिकों को झेलनी पड़ रही गंभीर आर्थिक समस्याओं के संबंध में राज्य सरकार, राज्य परिवहन मंत्रालय और संबंधित विभागों को कई ज्ञापन तथा विस्तृत मांगपत्र सौंपे गए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस सहायता या समाधान नहीं मिला है।
वृद्धि टालने सुझाए थे कई विकल्प
संघ के अध्यक्ष ने बताया कि पिछले कुछ समय से स्कूल बस सेवाओं को सुरक्षित और विश्वसनीय रूप से जारी रखने के लिए आवश्यक सहायता और व्यावहारिक उपायों की मांग की जा रही थी।
बस किराए में वृद्धि टालने के लिए भी विभिन्न विकल्प सुझाए गए थे। हालांकि, बार-बार अनुरोध और लगातार किए गए प्रयासों के वावजूद संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
महाराष्ट्र स्कूल बस ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल गर्ग ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में कोई अन्य व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध नहीं होने के कारण स्कूल बस चालक मालिकों को परिवहन शुल्क बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
एसोसिएशन ने शुल्क बढ़ाने के बताए कारण
वर्ष 2026-27 के लिए जून से स्कूल बस शुल्क में 15 प्रतिशत की वृद्धि की जा रही है। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि यह वृद्धि केवल डीजल और ईंधन की बढ़ीं कीमतों के कारण नहीं है, बल्कि ईंधन खर्च, कर्मचारियों और बस स्टाफ के वेतन, वाहन रखरखाव लागत, स्पेयर पार्ट्स और उपभोग सामग्री के बढ़ते खर्च, बीमा और कानूनी अनुपालन शुल्क, टोल और परमिट संबंधी व्यय, अन्य परिचालन खर्च, ई-चालान और प्रवर्तन संबंधी जुर्मानों के बढ़ते बोझ तथा सामान्य महंगाई जैसे कई कारणों से यह निर्णय लिया गया है।
परिवहन क्षेत्र में बढ़ती लागत का असर सभी क्षेत्रों पर पड़ा है। विमानन कंपनियों ने भी किराए बढ़ाए हैं और कुछ स्थानों पर अपनी सेवा क्षमता में कटौती की है। इसी तरह स्कूल बस चालक मालिकों के लिए भी सुरक्षा मानकों और नियमों का पालन करते हुए सेवाएं जारी रखना कठिन होता जा रहा है।
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अभिभावकों की असुविधा पर जताया खेद
इस निर्णय से अभिभावकों और शैक्षणिक संस्थानों को होने वाली असुविधा पर खेद व्यक्त करते हुए महाराष्ट्र स्कूल बस ओनर्स एसोसिएशन ने कहा कि यदि सरकार से उचित सहायता नहीं मिली तो स्कूल परिवहन उद्योग का अस्तित्व बनाए रखना और अधिक कठिन हो जाएगा। एसोसिएशन ने कहा कि वह विद्यार्थियों को सुरक्षित, विश्वसनीय और प्रभावी परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
