महाराष्ट्र में RTO कर्मचारियों की हड़ताल से कामकाज ठप; ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन हस्तांतरण सेवाएं प्रभावित
Maharashtra RTO strike: भर्ती नियमों और पदोन्नति की मांगों को लेकर महाराष्ट्र के 63 आरटीओ कार्यालयों में कर्मचारियों की बेमियादी हड़ताल जारी है। लाइसेंस और वाहन हस्तांतरण का काम पूरी तरह ठप
- Written By: रूपम सिंह
RTO कर्मचारियों की हड़ताल (सोर्स - सोशल मिडिया)
Mumbai RTO Employee Union Protest: महाराष्ट्र में आरटीओ कर्मचारियों की बेमियादी हड़ताल ने संकट पैदा कर दिया है। हड़ताल के दूसरे दिन कामकाज रफ्तार थमी दिखाई दी। इसके चलते लाइसेंस नवीनीकरण, वाहन स्वामित्व हस्तांतरण, दस्तावेज सत्यापन समेत कई महत्वपूर्ण सेवाएं प्रभावित हुई हैं, जिससे आम नागरिकों की परेशानी बढ़ गई है। भर्ती नियमों को अंतिम रूप देने, लंबित पदोन्नतियों और सेवा संबंधी अन्य मांगों को लेकर कर्मचारी आंदोलन पर डटे हुए हैं।
कर्मचारी संगठन का दावा है कि हड़ताल को पहले दिन राज्यभर में शत प्रतिशत समर्थन मिला, जबकि सरकार और कर्मचारियों के बीच हुई बातचीत भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। महाराष्ट्र राज्य आरटीओ कर्मचारी संघ के अनुसार राज्यभर के 63 आरटीओ कार्यालयों के करीब 1300 से 1400 कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल में शामिल हैं, जिनमें मुंबई के 300 से 350 कर्मचारी भी शामिल हैं। हड़ताल के कारण ड्राइविंग लाइसेंस नवीनीकरण, वाहन हस्तांतरण, दस्तावेज सत्यापन और अन्य आरटीओ सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
कर्मचारियों का आरोप है कि 2022 में नए संगठनात्मक ढांचे को मंजूरी मिलने के बावजूद भर्ती नियम अब तक तय नहीं किए गए हैं, जिससे पदोन्नतियां और वित्तीय लाभअटके हुए हैं। संघ के महासचिव सुरेंद्र सरतापे ने बताया कि 15 जून को परिवहन आयुक्त राजेश नार्वेकर के साथ हुई बैठक में आठ प्रमुख मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ।
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हड़ताल का मुंबई में भी दिखा सीमित असर
कर्मचारियों की मांगों में भर्ती नियमों को अंतिम रूप देना, लंबित पदोन्नतियां और 10, 20 व 30 वर्ष की सेवा पूरी करने वालों को वित्तीय लाभ देना शामिल है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर सकारात्मक निर्णय होने तक हड़ताल जारी रहेगी। राज्यभर में आरटीओ कर्मचारियों की हड़ताल जारी है, लेकिन मंगलवार को मुंबई में इसका सीमित असर देखने को मिला है। संगठन का कहना है कि मांगों पर ठोस निर्णय होने तक हड़ताल जारी रहेगी।
मोटर वाहन विभाग आरटीओ कर्मचारी संघ, महाराष्ट्र के महासचिव सुरेंद्र सरतापे ने बताया कि राज्यभर के आरटीओ कर्मचारियों ने हड़ताल के पहले दिन सफलतापूर्वक आंदोलन किया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस निर्णय या सकारात्मक पहल नहीं हुई है। इसी वजह से 17 जून को भी कर्मचारी हड़ताल पर बने रहेंगे। उन्होंने सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की।
वहीं, ठाणे की आरटीओ अधिकारी हेमांगिनी पाटील ने कहा कि हड़ताल के कारण कर्मचारी काम पर नहीं हैं, लेकिन विभाग की ओर से कामकाज को यथासंभव सुचारू रखने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हड़ताल से संबंधित बातचीत और समाधान की दिशा में क्या प्रगति हुई है, इसकी जानकारी परिवहन आयुक्त कार्यालय के पास उपलब्ध होगी।
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हड़ताल का सबसे अधिक असर रिक्शा और टैक्सी चालकों पर पड़ रहा है। रामसेना रिक्शा-टैक्सी चालक-मालक संघ के अध्यक्ष विष्णु कुमार मिश्रा ने कहा कि कर्मचारियों के आंदोलन के कारण परमिट, फिटनेस प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेजों से जुड़े कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं। कई चालकों के मेमो जारी नहीं हो पा रहे हैं और फिटनेस नवीनीकरण जैसी प्रक्रियाएं अटक गई हैं।
उन्होंने कहा कि एक ओर सड़क पर जांच अभियान के दौरान चालकों पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर हड़ताल के कारण जरूरी दस्तावेजों का नवीनीकरण नहीं हो पा रहा है। इसका सीधा नुकसान गरीब और मेहनतकश रिक्शा तथा टैक्सी चालकों को उठाना पड़ रहा है। उन्होंने राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर कर्मचारियों और प्रशासन के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने तथा आरटीओ सेवाएं जल्द से जल्द बहाल करने की मांग की।
हड़ताल के चलते परिवहन क्षेत्र से जुड़े हजारों नागरिक और वाहन चालक प्रभावित हो रहे हैं। अब सभी की नजर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच संभावित वार्ता पर टिकी हुई है, जिससे इस गतिरोध का जल्द समाधान निकल सके।
