Maharashtra Revenue Department News: राज्य के राजस्व विभाग में 7/12 उतारों में हेरफेर का अब तक का बड़ा घोटाला सामने आया है। राजस्व मंत्री Chandrashekhar Bawankule ने विधान परिषद में इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि लेखन सुधार के नाम पर जमीन के रिकॉर्ड में मनमाने बदलाव किए गए, जिससे करीब 1 से डेढ़ लाख किसानों को नुकसान पहुंचा है।
मंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता 1966 की धारा 155 का उद्देश्य केवल 7/12 उतारों में लेखन संबंधी त्रुटियों को सुधारना है, लेकिन कुछ अधिकारियों ने इसका दुरुपयोग कर जमीन के मालिकाना हक तक बदल दिए। विशेष रूप से पुणे जिले में बिना मूल मालिक की अनुमति के रिकॉर्ड में बदलाव और नियमों के विरुद्ध आदेश पारित करने के मामले सामने आए हैं।
आरोप है कि कई मामलों में जमीन को गैर-कृषि (एनए) में भी परिवर्तित किया गया, जिससे निजी हित साधे गए।
विधान परिषद में इस मुद्दे को उठाते हुए अनिल परब ने कहा कि धारा 155 का दुरुपयोग बड़े स्तर पर हो रहा है और किसानों को न्याय पाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की।
मंत्री बावनकुळे ने माना कि यह गंभीर मामला है और इसे राजस्व विभाग का बड़ा घोटाला कहा जा सकता है। उन्होंने बताया कि जांच रिपोर्ट जनवरी में प्राप्त हो चुकी है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए जा रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में तहसीलदारों से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक, जो भी जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मामले की जांच के लिए विभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में समिति गठित की गई थी। सरकार ने आश्वासन दिया है कि सभी अनियमितताओं को दुरुस्त कर आगामी सत्र में विस्तृत रिपोर्ट सदन के समक्ष पेश की जाएगी।