महाराष्ट्र मानसून 2026: किसानों की बढ़ी चिंता, सामान्य से कम बारिश का अनुमान; IMD ने जारी किया पूर्वानुमान
Maharashtra Monsoon 2026: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग का पूर्वानुमान, महाराष्ट्र में इस साल सामान्य से कम (92%) बारिश की संभावना। पूर्वानुमान को लेकर कोंकण और विदर्भ में किसानों की चिंता बढ़ी।
- Written By: अनिल सिंह
Maharashtra Monsoon Forecast 2026 प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स AI)
Maharashtra Monsoon Forecast 2026: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सोमवार को दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 का पहला आधिकारिक पूर्वानुमान जारी कर दिया है, जिसने देश के साथ-साथ महाराष्ट्र के किसानों की भी चिंता बढ़ा दी है। आईएमडी के अनुसार, इस वर्ष देश में औसत वर्षा का केवल 92 प्रतिशत होने का अनुमान है, जिसे मौसम विज्ञान की भाषा में ‘सामान्य से कम’ वर्षा की श्रेणी में रखा जाता है।
मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. एम. मोहपात्रा ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र में भी मानसून की स्थिति बहुत उत्साहजनक नहीं रहने वाली है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश का स्तर सामान्य से नीचे रह सकता है।
महाराष्ट्र के इन क्षेत्रों पर होगा असर
पूर्वानुमान के मुताबिक, महाराष्ट्र के कोंकण, मध्य महाराष्ट्र और विदर्भ जैसे कृषि प्रधान क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। राज्य में कुल औसत वर्षा का केवल 90 से 95 प्रतिशत हिस्सा ही प्राप्त होने का अनुमान लगाया गया है। वर्षा की कमी का सीधा असर खरीफ की फसलों और जल संचयन पर पड़ सकता है।
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अल नीनो और हिंद महासागर की स्थिति
डॉ. मोहपात्रा ने बताया कि मानसून के शुरुआती महीनों यानी जून और जुलाई में वर्षा की स्थिति लगभग सामान्य बनी रहेगी। हालांकि, जुलाई के उत्तरार्ध से लेकर सितंबर तक अल नीनो की स्थिति सक्रिय होने की आशंका है। राहत की बात यह है कि इसी दौरान हिंद महासागर में कुछ अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं, जिससे अल नीनो का नकारात्मक प्रभाव कुछ हद तक कम हो सकता है। यदि हिंद महासागर का प्रभाव सकारात्मक रहा, तो अल नीनो का असर बहुत अधिक महसूस नहीं होगा।
वर्षा की श्रेणियों को समझना
आईएमडी वर्षा मापने के लिए पांच प्रमुख श्रेणियों का उपयोग करता है:
- 90% से कम: अपर्याप्त वर्षा (सूखे जैसी स्थिति)
- 90% से 95%: औसत से कम (2026 का अनुमान इसी श्रेणी में है)
- 96% से 104%: सामान्य वर्षा
- 105% से 110%: औसत से अधिक वर्षा
- 110% से अधिक: अत्यधिक वर्षा
मौसम विभाग के इस पूर्वानुमान के बाद अब राज्य सरकार और कृषि विभाग को जल प्रबंधन और वैकल्पिक बुवाई योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करना होगा, ताकि किसानों को संभावित सूखे या पानी की कमी से बचाया जा सके।
