महाराष्ट्र में क्यों नहीं हो रही बारिश? ये हैं 5 बड़े कारण, जानिए कब सक्रिय होगा मानसून
Maharashtra Monsoon Delay Reasons IMD: महाराष्ट्र में कमजोर मानसूनी हवाओं के कारण मानसून अटका। IMD ने बताए 5 बड़े कारण, 24-25 जून से दोबारा सक्रिय होने की उम्मीद।
- Written By: अनिल सिंह
IMD से जारी सैटेलाइट तस्वीर (फोटो क्रेडिट-X)
Maharashtra Monsoon Delay Reasons: भीषण और तपती गर्मी का सामना कर रहे महाराष्ट्र के नागरिकों के लिए मानसून का इंतजार लंबा होता जा रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, इस साल मानसून ने समय पर दस्तक देते हुए बीते 8 जून 2026 को दक्षिण कोंकण और उससे सटे दक्षिण मध्य महाराष्ट्र के हिस्सों में प्रवेश तो कर लिया था, लेकिन उसके बाद से ही मानसूनी हवाओं की रफ्तार पर अचानक ब्रेक लग गया है।
आमतौर पर 10 से 15 जून के बीच पूरे महाराष्ट्र को तरबतर कर देने वाला मानसून अब भी कोंकण बेल्ट में ही अटका हुआ है, जिससे सैटेलाइट तस्वीरों से अचानक बादल गायब दिखाई दे रहे हैं। इस सुस्ती के कारण देश भर में जून महीने की सामान्य बारिश में करीब 41 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने मानसून के रुकने के पीछे 5 प्रमुख वैज्ञानिक कारण बताए हैं:
अरब सागर से आने वाली नमी युक्त हवाओं का कमजोर पड़ना
मानसून को आगे बढ़ाने और भारी बारिश के लिए अरब सागर से उठने वाली तेज और नमी से भरी पश्चिमी हवाएं सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वर्तमान में अरब सागर के ऊपर से उठने वाली ये मानसूनी हवाएं बेहद कमजोर और सुस्त हैं। हवाओं की गति धीमी होने के कारण वायुमंडल में पर्याप्त जलवाष्प (नमी) नहीं बन पा रही है, जिससे बादलों का निर्माण रुक गया है और मानसून आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
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दक्षिण-पश्चिमी निचली हवाओं का प्रवाह थमना
समुद्र की सतह से कुछ ऊंचाई पर बहने वाली दक्षिण-पश्चिमी निचली हवाएं मानसून को मुख्य भूमि की ओर धकेलती हैं। ये हवाएं ही कोंकण के तटीय इलाकों से नमी को महाराष्ट्र के अंदरूनी हिस्सों (जैसे मराठवाड़ा और विदर्भ) तक ले जाती हैं। इन हवाओं के कमजोर पड़ने से तटीय और अंदरूनी इलाकों के तापमान में असंतुलन पैदा हो गया है और नमी का बहाव पूरी तरह ठप है।
भूमध्य रेखा पार करने वाली हवाओं में सुस्ती
उष्णकटिबंधीय मौसम चक्र के अनुसार, दक्षिणी गोलार्ध से उठने वाली हवाएं भूमध्य रेखा (Equator) को पार कर हिंद महासागर और अरब सागर में प्रवेश करती हैं और भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून का मुख्य इंजन बनती हैं। इस बार भूमध्य रेखा को पार करने वाली इन हवाओं की गति सामान्य से काफी कम है, जिसके चलते भारतीय उपमहाद्वीप की ओर आने वाले नमी के मुख्य स्रोत को पर्याप्त बूस्ट नहीं मिल सका है।
अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र न बनना
मानसून की प्रगति केवल हवाओं की दिशा पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसे आगे खींचने के लिए समुद्री क्षेत्रों में कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) या चक्रवाती परिसंचरण की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, केरल से लेकर महाराष्ट्र के पश्चिमी तट के समानांतर बनने वाली कम दबाव की पट्टी, जिसे ‘ऑफशोर ट्रफ’ कहा जाता है, इस बार गायब है। दोनों ही समुद्रों में कोई मजबूत वेदर सिस्टम न बनने से मानसूनी हवाओं को उत्तर की तरफ बढ़ने की दिशा नहीं मिल पा रही है।
मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) का प्रतिकूल होना
भूमध्य रेखा के पास पश्चिम से पूर्व की ओर घूमने वाला हवा और बादलों का वैश्विक बैंड, जिसे ‘मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन’ (MJO) कहते हैं, इस समय भारत के लिए अनुकूल स्थिति में नहीं है। इसके कमजोर दौर में होने और प्रशांत महासागर में एल नीनो के बचे हुए प्रभाव के कारण वेस्टर्न जेट स्ट्रीम (क्षोभमंडल में 150 किमी/घंटा से तेज बहने वाली हवाएं) सामान्य से अधिक दक्षिण की ओर खिसक गई हैं। इसने मानसूनी बादलों को उत्तर की ओर बढ़ने से रोक दिया है।
कब मिलेगी राहत?
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा अनुमान के मुताबिक, मौसम प्रेमियों और किसानों को ज्यादा निराश होने की जरूरत नहीं है। आगामी 24 से 25 जून 2026 के बीच बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में हवाओं के दोबारा जोर पकड़ने की संभावना है, जिससे मानसून एक बार फिर सक्रिय होगा और पूरे महाराष्ट्र में झमाझम बारिश का दौर शुरू हो सकेगा।
