भारत बनाम इंग्लैंड सेमीफाइनल (सोर्स: साेशल मीडिया)
Maharashtra MLA Match Ticket Demand: राजनीति के मैदान में अक्सर ‘चुनावी टिकट’ के लिए खींचतान करने वाले माननीय विधायक इन दिनों एक अलग ही ‘टिकट’ की जुगत में लगे थे। मुंबई के प्रतिष्ठित वानखेड़े स्टेडियम में आज भारत बनाम इंग्लैंड टी20 विश्व कप सेमीफाइनल मैच खेला जा रहा है। इसका खुमार महाराष्ट्र की राजनीति पर भी पूरी तरह चढ़ गया है। आलम यह है कि विधानसभा से लेकर विधान परिषद तक, विधायक अपनी विधायी जिम्मेदारियों के बीच स्टेडियम की गैलरी में बैठकर टीम इंडिया को चीयर करने की मांग उठा रहे थे।
महाराष्ट्र विधानसभा का बजट सत्र इन दिनों वानखेड़े स्टेडियम के बेहद करीब स्थित विधान भवन में चल रहा है। सदन की कार्यवाही के दौरान भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने हल्के-फुल्के अंदाज में इस मुद्दे की शुरुआत की। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि विधायकों की उस इच्छा का सम्मान किया जाए, जिसमें वे स्टेडियम में बैठकर भारत को इंग्लैंड को हराते हुए देखना चाहते हैं।
इस पर पीठासीन अधिकारी दिलीप लांडे ने सदन की भावनाओं को भांपते हुए कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि जो विधायक मैच देखना चाहते हैं, उनके लिए उपयुक्त व्यवस्था की जाए। उन्होंने यहां तक कह दिया कि सरकार को एक घंटे के भीतर इस पर फैसला लेना चाहिए। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने आश्वासन दिया कि वे इस मांग पर गंभीरता से विचार करेंगे।
भारत बनाम इंग्लैंड सेमीफाइनल मैच का यह जुनून विधान परिषद में भी देखने को मिला, लेकिन यहां सुर थोड़े तीखे थे। शिवसेना (UBT) के सचिन अहिर ने पास और टिकट न मिलने पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने याद दिलाया कि जब शरद पवार बीसीसीआई के अध्यक्ष थे, तब सत्र के दौरान विधायकों को मैच के पास दिए जाते थे।
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अहिर ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन टिकट तो उपलब्ध होते हैं, लेकिन बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए थोक में टिकट खरीद लेती हैं, जिससे आम लोगों और जनप्रतिनिधियों के लिए कुछ नहीं बचता। उन्होंने तीखा सवाल उठाते हुए कहा, “पुलिस और आईएएस अधिकारियों को स्टेडियम के पास आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की बात पर कोई ध्यान नहीं देता।”
इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के सदस्य एकजुट नजर आए। सभी ने एक सुर में मांग की कि सरकार वानखेड़े में उनके बैठने का इंतजाम करे। फिलहाल, बजट सत्र की फाइलों से ज्यादा चर्चा अब इस बात की है कि कितने विधायकों को वानखेड़े का ‘वीआईपी पास’ मिल पाएगा।