

Market Cess Protes: कृषि उपज मंडी समितियों द्वारा वसूले जा रहे 'मार्केट सेस' को तत्काल रद्द करने की मांग को लेकर महाराष्ट्र राज्य व्यापारी कार्रवाई समिति ने राज्यव्यापी असहयोग आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। इस आंदोलन में राज्य के करीब 5 लाख व्यापारी शामिल होंगे। व्यापारियों ने 'न सेस वसूलेंगे, न सेस भरेंगे' का संकल्प लिया है।
2 अक्टूबर से असहयोग आंदोलन शुरू करने का निर्णय कोल्हापुर चैंबर ऑफ कॉमर्स और कोल्हापुर ग्रेन मर्चेंट्स एसोसिएशन के तत्वावधान में कोल्हापुर में आयोजित राज्यव्यापी व्यापारी परिषद में लिया गया। परिषद के बाद हुई पत्रकार वार्ता में दीपेन अग्रवाल और रवींद्र माणगावे ने आंदोलन की रूपरेखा बताई।
दीपेन अग्रवाल ने कहा कि सरकार ने मंडी समितियों को रवा, मैदा, खाद्य तेल, दालें, ड्राई फ्रूट्स पर सेवा शुल्क वसूलने का अधिकार दिया है, जबकि व्यापारियों से जीएसटी भी लिया जा रहा है। इससे व्यापारियों पर दोहरे कर का बोझ पड़ रहा है, जिसका असर सीधे ग्राहकों और किसानों पर हो रहा है।
रवींद्र माणगावे ने आरोप लगाया कि सेस वसूलने के बावजूद मंडी समितियां बुनियादी सुविधाएं नहीं दे रही हैं। FAM के अध्यक्ष जितेंद्र शाह के अनुसार मंडी समितियां हर साल मार्केट सेस से लगभग 800 करोड़ रुपये वसूलती हैं, लेकिन इसका 70% हिस्सा कर्मचारियों के वेतन और प्रशासनिक खर्च में चला जाता है।
परिषद में पारित प्रस्तावों में मार्केट सेस रद्द करना, मंडी समितियों को सरकार से अलग अनुदान देना, सेवा शुल्क/यूजर चार्जेस वसूलने का अधिकार रद्द करना और लाइसेंस ऑनलाइन जारी करना शामिल है।
कैट के उपाध्यक्ष सुरेश भाई ठक्कर ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और विपणन मंत्री से चार बार चर्चा हो चुकी है, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। आंदोलन की तैयारी के तहत 9 अगस्त से जनप्रतिनिधियों और मंडी समितियों को ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं ।
इसके बाद मुंबई और नासिक में राज्यव्यापी परिषदें होंगी। दीपेन अग्रवाल ने कहा कि यह किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि राज्य के सभी प्रमुख व्यापारी संगठनों का संयुक्त आंदोलन है। सरकार ने तुरंत निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।