महाराष्ट्र में कक्षा 1 से 10 तक मराठी पढ़ाना अनिवार्य, नियम न मानने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द होगी
Maharashtra Government ने कक्षा 1 से 10 तक मराठी भाषा पढ़ाना सभी स्कूलों के लिए अनिवार्य कर दिया है। नियमों का पालन नहीं करने वाले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बोर्ड के स्कूलों की मान्यता रद्द की जाएगी।
- Written By: अपूर्वा नायक
मंत्री दादा भुसे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Marathi Compulsory Schools Rule: महाराष्ट्र के स्कूली शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने कक्षा एक से 10 वीं तक मराठी को अनिवार्य रूप से पढ़ाने के कानून का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने साफ़ तौर से कहा है कि राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बोर्ड से संबद्ध समेत सभी स्कूलों के लिए इस कानून का पालन करना अनिवार्य है। अन्यथा उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी। भुसे शुक्रवार को राज्य विधानसभा में बोल रहे थे।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार इस मामले में जल्द ही निरीक्षण शुरू करेगी और अगर स्कूल मराठी की पढ़ाई से संबंधित मानदंडों का पालन करने में विफल रहते हैं, तो उनकी मान्यता रद्द भी की जा सकती है। राज्य ने पहले ही इस संबंध में कानून बना लिया है। तथा 9 मार्च 2020 को अधिसूचना जारी की गई थी।
सम्बंधित ख़बरें
राज्य में नकली दवा कंपनियों पर कसेगा शिकंजा, जांच के लिए राज्य सरकार ने बनाई विशेष समिति
MSRTC का फैसला; निर्धारित स्थानों पर नहीं रोकी बस तो कर्मचारियों की ही कटेगी जेब, वसूला जाएगा जुर्माना
लेफ्ट फ्रंट को हटा अपनी सरकार बनाना चाह रही है कांग्रेसः निरुपम ने कहा INDI गठबंधन के भीतर चल रहा है मतभेद
रक्षा मंत्री की पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी- ‘नापाक हरकतें नहीं रोकी तो दाना-पानी कर देंगे बंद’
ये भी पढ़ें :- पीएम किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त जारी, 9.32 करोड़ किसानों के खातों में पहुंची 18,640 करोड़ की राशि
अंतरराष्ट्रीय स्कूलों में मराठी नहीं पढ़ाए जाने का आरोप
विधानसभा में कुछ विधायकों ने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय स्कूलों में मराठी नहीं पढ़ाए जाने का आरोप लगाते हुए चिंता जताई थी, जिस पर मंत्री ने कहा कि सरकार प्राप्त शिकायतों के आधार पर निरीक्षण करेगी।
उन्होंने कहा कि अगर जांच में यह पाया जाता है कि मराठी नहीं पढ़ाई जा रही है, तो ऐसे संस्थानों को पहले नियमों का पालन करने के लिए कहा जाएगा और स्थिति को सुधारने का अवसर दिया जाएगा। अगर स्कूलों को ऐसा अवसर दिए जाने के बाद भी ये अनिवार्य प्रावधान का पालन करने में विफल रहते हैं, तो सरकार उनकी मान्यता रद्द करने सहित कार्रवाई शुरू कर सकती है।
