महाराष्ट्र में महायुति का एकछत्र राज! नहीं बचा कोई ‘विपक्ष का नेता’, राज्य में सियासी हलचल तेज
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में एक अनोखी स्थिति बन गई है। राज्य में अब दोनों सदन यानी विधानसभा और विधान परिषद बिना विपक्ष के नेता के चलेंगे। अंबादास दानवे का कार्यकाल खत्म हो गया है।
- Written By: आकाश मसने
काॅन्सेप्ट फोटो (डिजाइन)
Ambadas Danve Tenure End: महाराष्ट्र अब विपक्ष के नेता के बगैर ही चलेगा। महाराष्ट्र विधानसभा में पहले ही विपक्ष नेता विहीन है। उस पर विधान परिषद में विपक्ष के नेता रहे शिवसेना (यूबीटी) पार्टी के विधायक अंबादास दानवे का कार्यकाल भी 28 अगस्त 2025 को समाप्त हो गया है। पिछले मानसून सत्र में सरकार ने उनका विदाई समारोह भी संपन्न करा दिया था। ऐसे में महाराष्ट्र का विपक्ष अब पूरी तरह से विपक्ष के नेता विहीन हो गया है।
विधानसभा चुनाव 2024 में विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी में शामिल किसी भी घटक दल को विपक्ष का नेता पद पाने लायक सफलता नहीं मिली थी। विधानसभा चुनाव में शिवसेना यूबीटी ने 20 सीटें जीतीं हैं। तो वहीं कांग्रेस ने 16 और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) ने 10 सीटें जीतीं। समाजवादी पार्टी-2 और सीपीआई (एम) की-1 सीट को मिलाने से विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाडी के 49 विधायक होते हैं।
288 विधायकों वाले महाराष्ट्र विधानसभा में विरोधी पक्ष नेता के लिए 10 फीसदी सीट के फार्मूले के हिसाब से किसी भी विपक्षी दल के पास पर्याप्त संख्याबल यानी अपने अकले 29 विधायक नहीं हैं। इसलिए विधायकों की पर्याप्त संख्या नहीं होने की वजह से अभी तक विधानसभा में विपक्ष के नेता का पद किसी भी विपक्षी पार्टी को नहीं मिला है। विपक्षी गठबंधन विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विहीन है।
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अंबादास दानवे (सोर्स: सोशल मीडिया)
शिवसेना (यूबीटी) ने ठोका है दावा
सत्ता पक्ष का दावा है कि पर्याप्त संख्या बल नहीं होने पर किसी पार्टी को विपक्ष के नेता का पद दिया जाए या नहीं, इसका निर्णय विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के विवेक पर निर्भर होगा। लेकिन विधानसभा सचिवालय ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना द्वारा लिखे गए पत्र के जवाब में कहा था कि विपक्ष के नेता पद के लिए कोई लिखित नियम उपलब्ध नहीं है। इसलिए विधानसभा में सबसे ज्यादा विधायकों वाला विपक्षी दल होने की वजह से यूबीटी ने विपक्ष के नेता पद पर दावा ठोक रखा है।
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शिवसेना (यूबीटी) इसे अपना अधिकार बताता है और अपने विधायक भास्कर जाधव को विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाने का प्रस्ताव विधानसभा अध्यक्ष को दिया है। फिलहाल बजट सत्र तथा उसके बाद हुए मानसून सत्र में यूबीटी की मांग को विधानसभा अध्यक्ष की मंजूरी नहीं मिल सकी थी।
अब नागपुर में होने वाले शीतकालीन सत्र में इस पर निर्णय होने की उम्मीद यूबीटी लगा रहा है। इस पर विधान परिषद भी नेता विहीन होने से विपक्ष को बड़ा झटका लगा है। अब साल के अंत में नागपुर में होने वाले विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में विपक्ष के नेता के पद का मसला सुलझ पाएगा? इस पर राज्य की जनता की नजर रहेगी।
