

National Household Travel Survey Mass Transit Maharashtra: महाराष्ट्र देश में सार्वजनिक परिवहन आधारित शहरी आवागमन की तस्वीर में सबसे आगे नजर आ रहा है। नेशनल हाउसहोल्ड ट्रेवल सर्वे 2025-26 के अनुसार देश के शहरी इलाकों में काम पर जाने वाले लोगों की 5% यात्राएं मेट्रो, मोनोरेल, उपनगरीय रेल और ट्राम से होती हैं, जबकि महाराष्ट्र में यह हिस्सेदारी 20.7% है।
यानी महाराष्ट्र राज्य में मास ट्रांजिट का इस्तेमाल राष्ट्रीय शहरी औसत से 15.7 प्रतिशत अंक अधिक और करीब चार गुना है। यह अंतर मुख्यतः मुंबई और उसके व्यापक महानगरीय क्षेत्र में लोकल ट्रेन, मेट्रो और अन्य मास ट्रांजिट नेटवर्क की बड़ी भूमिका को दर्शाता है।
वहीं राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं की यात्रा की तस्वीर भी महत्वपूर्ण है। शहरी क्षेत्रों में 21.7% महिला कामगार बस से काम पर जाती हैं।
पुरुषों में यह अनुपात काफी कम है। इससे संकेत मिलता है कि सार्वजनिक परिवहन खासकर महिलाओं की रोजगार तक पहुंच और रोजाना की आर्थिक गतिविधियों से सीधे जुड़ा है। बस पर सवार महिलाएंः सर्वे की सबसे दिलचस्प तस्वीर महिलाओं की यात्रा को लेकर सामने आती है।
देश के शहरी इलाकों में काम पर जाने वाली 21.7% महिला कामगार बस को प्राथमिक साधन के रूप में इस्तेमाल करती हैं। पुरुषों में यह हिस्सेदारी काफी कम है। यानी मुंबई शहरों में महिलाओं के रोजगार और उनकी आवाजाही के बीच सार्वजनिक बस व्यवस्था की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
यात्रा की लागत भी तस्वीर का अहम हिस्सा है। देश में काम पर आने-जाने का औसत मासिक खर्च 785 रुपये है। शहरी कामगारों के लिए यह 1,044 रुपये और ग्रामीण कामगारों के लिए 612 रुपये है। महिलाओं का औसत मासिक खर्च 533 रुपये रहा, जबकि पुरुषों का 835 रुपये।
42.6%- कामगार दोपहिया से काम पर जाते हैं।
21.7%- शहरी महिला कामगार बस से काम पर जाती है।
6.7%- सभी कामगार बस को हैं।
5%- शहरी कार्यस्थल यात्राएं मेट्रो/लोकल/मोनोरेल/ट्राम से।
20.7% महाराष्ट्र में इन मास ट्रांजिट साधनों की हिस्सेदारी।
₹785- देश में काम पर आने-जाने का औसत मासिक खर्च।
राष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक परिवहन अभी भी कुल कार्यस्थल यात्राओं का छोटा हिस्सा है।
42.6% कामगार दोपहिया से काम पर जाते हैं। जबकि बस का हिस्सा 6.7% है।
2.3% लोग ट्रेन, मेट्रो, मोनोरेल या ट्राम जैसी रेल आधारित सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। वहीं 28.3% कामगार पैदल यात्रा करते हैं।