Maharashtra Government का बड़ा फैसला, जमीन मालिकों के वारिसों को मिलेगा अलग पुनर्वसन लाभ
Maharashtra Government ने जमीन अधिग्रहण से जुड़े मामलों में बड़ा बदलाव करते हुए अब मृत जमीन मालिकों के प्रत्येक वारिस को अलग यूनिट मानकर पुनर्वसन लाभ देने का निर्णय लिया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
महाराष्ट्र भूमि अधिग्रहण उत्तराधिकारी नीति (सौ. सोशल मीडिया )
Maharashtra Land Acquisition Heirs Rehabilitation Policy: राज्य सरकार के एक महत्वपूर्ण फैसले से परियोजना प्रभावित जमीन मालिकों के वारिसों को बड़ी राहत मिली है।
यदि जमीन अधिग्रहण के निर्णय की तारीख से पहले, यानी दिसंबर 2004 से पहले मूल जमीन मालिक की मृत्यु हो गई हो तो अब उसके वारिसों को स्वतंत्र परियोजना प्रभावित (अलग यूनिट) के रूप में लाभ देने का निर्णय राहत एवं पुनर्वसन विभाग ने लिया है।
पहले लाभ एक साथ दिया जाता था लेकिन अब हर वारिस को अलग अधिकार मिलेगा। नये निर्णय के अनुसार यदि मूल जमीन मालिक की मृत्यु निर्णय से पहले हो गई है तो उसके बेटे, बेटियां और अगली पीढ़ी के वारिसों को अलग-अलग यूनिट के रूप में परियोजना प्रभावित माना जाएगा। इससे प्रत्येक को अलग-अलग पुनर्वसन लाभ मिलेंगे। इसके अलावा यदि किसी वारिस की भी मृत्यु हो जाती है तो उसके बच्चों को भी अलग हिस्सेदार मानकर लाभ दिया जाएगा।
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65% राशि जमा करने वाले मामलों को भी राहत
- जिन मामलों में परियोजना प्रभावितों से 65% राशि जमा करवाई गई है लेकिन जमीन का आवंटन अभी लंबित है, ऐसे मामलों को भी इस निर्णय का फायदा मिलेगा। इससे लंबे समय से अटके मामलों में तेजी आने की संभावना है।
- पुरानी व्यवस्था से होते थे विवाद पहले मृत जमीन मालिक के सभी वारिसों को एक ही यूनिट मानकर लाभ दिया जाता था। कई बार सिर्फ एक ही वारिस का नाम परियोजना प्रभावित के रूप में दर्ज किया जाता था, जबकि बाकी वारिसों को केवल अधिकारधारक के रूप में दिखाया जाता था।इससे लाभों का सही वितरण नहीं हो पाता था और कई कानूनी विवाद पैदा होते थे।
Maharashtra में एक समान और स्पष्ट नीति लागू : मकरंद पाटिल
राहत एवं पुनर्वास मंत्री मकरंद पाटिल ने कहा कि इस निर्णय से वारिसों को, खासकर बेटियों को, स्वतंत्र अधिकार से लाभमिलेगा। साथ ही पूरे राज्य में एक समान और स्पष्ट नीति लागू की गई है। उन्होंने सभी जिला पुनर्वास अधिकारियों, उपविभागीय अधिकारियों और संबंधित राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नये नियमों के अनुसार आदेश जारी कर शेष वारिसों को लाभदिया जाए।
रिकॉर्ड में देरी की समस्या
महाराष्ट्र भूमि राजस्व अधिनियम के अनुसार, भूमापन प्रक्रिया से पहले मृत जमीन मालिकों के वारिसों के नाम समय पर सातबारा रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाते थे। इसके कारण कई वारिस पुनर्वसन लाभ से वंवित रह जाते थे। नये फैसले से ऐसे मामलों में भी न्याय मिलने की उम्मीद है।
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‘एक यूनिट’ की अवधारणा में बदलाव
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ‘एक यूनिट’ की अवधारणा अब केवल भू मापन मुआवजा राशि के वितरण तक सीमित रहेगी। पुनर्वास कानून के तहत परियोजना प्रभावित व्यक्ति की पहचान करते समय यह लागू नहीं होगी, यानी हर पात्र वारिस को अलग परियोजना प्रभावित माना जाएगा।
