महाराष्ट्र भूमि अधिग्रहण उत्तराधिकारी नीति (सौ. सोशल मीडिया )
Maharashtra Land Acquisition Heirs Rehabilitation Policy: राज्य सरकार के एक महत्वपूर्ण फैसले से परियोजना प्रभावित जमीन मालिकों के वारिसों को बड़ी राहत मिली है।
यदि जमीन अधिग्रहण के निर्णय की तारीख से पहले, यानी दिसंबर 2004 से पहले मूल जमीन मालिक की मृत्यु हो गई हो तो अब उसके वारिसों को स्वतंत्र परियोजना प्रभावित (अलग यूनिट) के रूप में लाभ देने का निर्णय राहत एवं पुनर्वसन विभाग ने लिया है।
पहले लाभ एक साथ दिया जाता था लेकिन अब हर वारिस को अलग अधिकार मिलेगा। नये निर्णय के अनुसार यदि मूल जमीन मालिक की मृत्यु निर्णय से पहले हो गई है तो उसके बेटे, बेटियां और अगली पीढ़ी के वारिसों को अलग-अलग यूनिट के रूप में परियोजना प्रभावित माना जाएगा। इससे प्रत्येक को अलग-अलग पुनर्वसन लाभ मिलेंगे। इसके अलावा यदि किसी वारिस की भी मृत्यु हो जाती है तो उसके बच्चों को भी अलग हिस्सेदार मानकर लाभ दिया जाएगा।
राहत एवं पुनर्वास मंत्री मकरंद पाटिल ने कहा कि इस निर्णय से वारिसों को, खासकर बेटियों को, स्वतंत्र अधिकार से लाभमिलेगा। साथ ही पूरे राज्य में एक समान और स्पष्ट नीति लागू की गई है। उन्होंने सभी जिला पुनर्वास अधिकारियों, उपविभागीय अधिकारियों और संबंधित राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नये नियमों के अनुसार आदेश जारी कर शेष वारिसों को लाभदिया जाए।
महाराष्ट्र भूमि राजस्व अधिनियम के अनुसार, भूमापन प्रक्रिया से पहले मृत जमीन मालिकों के वारिसों के नाम समय पर सातबारा रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाते थे। इसके कारण कई वारिस पुनर्वसन लाभ से वंवित रह जाते थे। नये फैसले से ऐसे मामलों में भी न्याय मिलने की उम्मीद है।
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सरकार ने स्पष्ट किया है कि ‘एक यूनिट’ की अवधारणा अब केवल भू मापन मुआवजा राशि के वितरण तक सीमित रहेगी। पुनर्वास कानून के तहत परियोजना प्रभावित व्यक्ति की पहचान करते समय यह लागू नहीं होगी, यानी हर पात्र वारिस को अलग परियोजना प्रभावित माना जाएगा।