महाराष्ट्र की जेलों में स्किल डेवलपमेंट से 36 करोड़ का राजस्व, 43 हजार कैदियों को प्रशिक्षण
Prison Industrial Training In Maharashtra: महाराष्ट्र की 60 जेलों में 43 हजार से अधिक कैदियों को स्किल डेवलपमेंट प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिसके कारण पिछले 3 सालों में सरकार की 36 करोड़ की कमाई हुई।
- Written By: अपूर्वा नायक
महाराष्ट्र जेल स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम (सौ. सोशल मीडिया )
Maharashtra Jail Skill Development: राज्य की 60 अलग-अलग जेलों में 43 हजार से ज्यादा कैदी हैं। इन कैदियों को स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग दी जाती है। इसके जरिए कैदी 66 तरह के अलग-अलग सामान बनाते हैं।
इसमें बांस का फर्नीचर, हैंडीक्राफ्ट, साबुन, कपड़े, मिट्टी के दीये और घरेलू सामान शामिल हैं। सरकार को ऐसे सामान की बिक्री से करीब 36 करोड़ का रेवेन्यू मिला है। इन कैदियों के मैनेजमेंट के साथ-साथ उनके खाने, पढ़ाई, कपड़े, हेल्थ, मेडिकल खर्च और सिक्योरिटी पर होने वाले खर्च की जिम्मेदारी सरकार की है।
इन कैदियों को रूरल डेवलपमेंट प्रोग्राम ट्रस्ट, टाटा स्ट्राइव, एम। मिंडा कॉर्पोरेशन लिमिटेड, एम हरिदास माधवदास सुंगधी, पुणे, भारत मिलिंग इंडस्ट्रीज, नासिक जैसी संस्थाओं के जरिए कंप्यूटर ट्रेनिंग, डिजिटल दोस्त, असिस्टेंट इलेक्ट्रीशियन, फील्ड टेक्नीशियन, प्लंबर, सोलर पैनल, घरेलू उपकरण, बढ़ईगीरी, सिलाई और गाड़ी रिपेयर का काम दिया जाता है। अलग-अलग तरह की स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग दी जाती है।
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36 करोड़ का हुआ कमाई का आंकड़ा
इस ट्रेनिंग के जरिए कैदियों से अलग-अलग सामान बनाए जाते हैं। कैदियों का बनाया सामान सरकार बेचती है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि पिछले तीन सालों में सरकार को इससे 36 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिला है।
सरकार को फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में 12.63 करोड़ रुपये, साल 2023-24 में 8.02 करोड़ रुपये और साल 2024-25 में 15.14 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिला है।
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मुख्यमंत्री फडणवीस ने लेजिस्लेटिव काउंसिल में दिए गए एक लिखित जवाब में बताया कि जेलों में इंडस्ट्रियल ट्रेनिग का मुख्य मकसद कैदियों को स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिग देना है। यह साफ किया गया है कि इसका मकसद इससे रेवेन्यू कमाना नहीं है। कैदियों को अलग-अलग नॉन-गवर्नमेंटल ऑर्गनाइजेशन के जरिए स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत ट्रेनिंग दी जाती है। उन्होंने कहा कि इस ट्रेनिग की वजह से कैदियों को उनकी सजा पूरी होने के बाद उनकी रोजी-रोटी का काम मिलता है।
