सात-बारा न होने पर भी महिलाएं कहलाएंगी ‘किसान’; महाराष्ट्र सरकार लाई देश का पहला ऐतिहासिक कानून
Women Farmer Empowerment Bill: महाराष्ट्र विधानसभा ने महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक 2026 पारित कर इतिहास रच दिया है। अब भूमि रिकॉर्ड न होने पर भी महिलाओं को कानूनी रूप से किसान का दर्जा मिलेगा।
- Written By: गोरक्ष पोफली
महिला कृषक (सोर्स: एआई फोटो)
Maharashtra Historic Law Women Farmers Get Legal Status: महाराष्ट्र में महिला किसानों को अब नई पहचान मिलेगी। महाराष्ट्र विधानसभा ने गुरुवार को सर्वसम्मति से ‘महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक-2026’ पारित कर दिया। कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने यह विधेयक सदन में पेश किया, जिसे सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का समर्थन मिला। इस कानून के तहत खेती के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन तथा अन्य कृषि से जुड़े कार्यों में सक्रिय महिलाओं को किसान का दर्जा दिया जाएगा।
सरकार ने स्पष्ट किया कि महिला के नाम पर सात-बारा (भूमि रिकॉर्ड) नहीं होने पर भी उसे किसान प्रमाणपत्र दिया जाएगा। हालांकि, दूसरे राज्यों की महिला कृषि मजदूरों या कृषि प्रसंस्करण उद्योग में कार्यरत महिलाओं को यह प्रमाणपत्र नहीं मिलेगा। कृषि मंत्री ने कहा कि इस कानून का उद्देश्य भूमि स्वामित्व बदलना नहीं, बल्कि कृषि कार्य में योगदान देने वाली महिलाओं को उनकी अलग पहचान और अधिकार दिलाना है।
सरकारी योजनाओं का मिलेगा लाभ
सरकार के अनुसार राज्य में केवल 15 से 20 प्रतिशत महिलाओं के नाम ही सात-बारा में दर्ज हैं। नए कानून से बड़ी संख्या में महिलाओं को किसान के रूप में मान्यता मिलेगी, जिससे वे केंद्र और राज्य सरकार की कृषि योजनाओं, प्रशिक्षण, फसल बीमा, ऋण, बाजार और कौशल विकास कार्यक्रमों का लाभ आसानी से उठा सकेंगी। इसके लिए महिला किसान डेटाबेस, सशक्तिकरण प्रकोष्ठ, सहायता अधिकारी, राज्य स्तरीय निगरानी समिति और महिला किसान निधि जैसी संस्थागत व्यवस्था भी बनाई जाएगी।
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देश में अपनी तरह का पहला कानून
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने कहा कि यह केवल एक कानून नहीं, बल्कि महिला किसानों के श्रम, सम्मान और अधिकारों को ऐतिहासिक न्याय देने वाला कदम है। उन्होंने कहा कि भारत में पहली बार महाराष्ट्र ने कृषि में महिलाओं की भूमिका को कानूनी मान्यता देने वाला ऐसा विधेयक पारित किया है।
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विपक्ष ने उठाए सुझाव
विधायक कैलाश पाटिल ने बाहरी राज्यों की महिलाओं को प्रमाणपत्र देने पर संभावित दुरुपयोग का मुद्दा उठाया, जिस पर सरकार ने स्पष्ट किया कि यह सुविधा केवल महाराष्ट्र की पात्र महिलाओं को मिलेगी। वहीं जयंत पाटिल ने महिलाओं के नाम पर भूमि दर्ज करने और महिला किसानों को बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराने पर सरकार से स्पष्ट नीति बताने की मांग की।
