PM-RAHAT Scheme: गोल्डन ऑवर में जीवन बचाना प्राथमिकता, मंत्री प्रकाश आबिटकर ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

PM-RAHAT Scheme: महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने PM-RAHAT योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत सड़क दुर्घटना पीड़ितों को 7 दिनों तक मुफ्त इलाज मिलेगा।
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महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Maharashtra Health Minister Prakash Abitkar News: महाराष्ट्र में सड़क दुर्घटनाओं के दौरान होने वाली मौतों के आंकड़ों को कम करने के लिए राज्य सरकार ने कमर कस ली है। स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने मंत्रालय में आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान PM-RAHAT योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं।

गोल्डन ऑवर में जीवन बचाना प्राथमिकता

बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री प्रकाश आबिटकर ने कहा कि सड़क दुर्घटना के बाद शुरुआती एक घंटा यानी 'गोल्डन ऑवर' किसी भी घायल की जान बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वित्तीय बाधाओं के कारण किसी भी घायल के इलाज में देरी नहीं होनी चाहिए। राज्य स्वास्थ्य आश्वासन सोसायटी को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है कि दुर्घटना पीड़ितों का सत्यापन और अस्पताल में प्रवेश बिना किसी बाधा के हो।

योजना की मुख्य विशेषताएं

PM-RAHAT योजना के तहत, सड़क दुर्घटना का शिकार हुए व्यक्तियों को 1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज प्रदान किया जाता है। इसकी कुछ प्रमुख शर्तें और लाभ इस प्रकार हैं।

  • समय सीमा: दुर्घटना के 24 घंटे के भीतर अस्पताल में भर्ती होना अनिवार्य है।
  • इलाज की अवधि: भर्ती होने के अधिकतम 7 दिनों तक का उपचार कवर किया जाता है।
  • अस्पताल: यह लाभ आयुष्मान भारत (PM-JAY) और महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना (MJPJAY) के तहत सूचीबद्ध सभी निजी और सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है।
  • पात्रता: इस योजना का लाभ भारतीय नागरिकों के साथ-साथ विदेशी नागरिकों को भी मिलेगा।

जागरूकता और कार्यान्वयन

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा शुरू की गई इस योजना के लिए महाराष्ट्र में राज्य सड़क सुरक्षा परिषद को नोडल एजेंसी बनाया गया है। भुगतान की प्रक्रिया परिवहन विभाग के माध्यम से पूरी की जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी सड़क दुर्घटना की स्थिति में तुरंत '112' (इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम) डायल करें। साथ ही, उन्होंने अधिकारियों को इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने का आदेश दिया ताकि ग्रामीण इलाकों में भी लोगों को इसकी जानकारी हो सके और समय पर सहायता मिल सके।

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