Maharashtra Health Committees: स्वास्थ्य सेवाओं पर सख्ती, निष्क्रिय समितियों को फिर से किया जाएगा सक्रिय
Maharashtra Health Committees News: महाराष्ट्र सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए निष्क्रिय स्वास्थ्य समितियों को फिर से सक्रिय करने का फैसला लिया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Health Committees Restart: गांव से लेकर शहर तक फैले हेल्थ नेटवर्क को मजबूत और जवाबदेह बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी तरह की लापरवाही पर सख्ती दिखाते हुए यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि स्वास्थ्य सेवाओं में ढिलाई कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निष्क्रिय पड़ी स्वास्थ्य समितियों को फिर से सक्रिय करने यानी ‘रीस्टार्ट’ करने का निर्णय लिया गया है। स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने आदेश दिया है कि उपकेंद्र से लेकर जिला अस्पताल तक सेवाओं की गुणवत्ता, पारदर्शिता और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर कड़ी नजर रखी जाएगी।
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राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जन केंद्रित बनाने के उद्देश्य से सभी स्तरों पर स्वास्थ्य समितियों के पुनरुद्धार की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उपकेंद्र से लेकर जिला अस्पताल तक कार्यरत रोगी कल्याण समिति, जन आरोग्य समिति, महिला आरोग्य समिति और ग्राम आरोग्य, पोषण एवं स्वच्छता समिति को फिर से सक्रिय कर उनकी भूमिका मजबूत की जाएगी।
मंत्री आबिटकर ने बताया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विभिन्न योजनाएं लागू की जा रही हैं लेकिन इन योजनाओं का लाभ नागरिकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए स्थानीय स्तर पर समितियों का सक्रिय होना जरूरी है। इन समितियों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर नजर रखी जा सकती है और स्थानीय जरूरतों के अनुसार तुरंत निर्णय लिए जा सकते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण व स्वच्छता समिति स्वच्छता, पोषण, जल आपूर्ति और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है, जबकि शहरी क्षेत्रों में महिला आरोग्य समिति स्थानीय समुदाय को जोड़कर स्वास्थ्य जागरूकता और सेवा समन्वय सुनिश्चित करती है। जन आरोग्य समिति और रोगी कल्याण समिति स्वास्थ्य संस्थानों में मरीज केंद्रित सेवाओं, सेवा गुणवत्ता और निधियों के पारदर्शी उपयोग की निगरानी करती हैं।
सुनिश्चित की जाएगी जनभागीदारी
स्वास्थ्य मंत्री आबिटकर ने स्पष्ट किया कि इन समितियों में जनप्रतिनिधियों, महिला समूहों, युवा संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और एनजीओ की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, टीबी मुक्त नागरिकों और नसबंदी करवा चुके पुरुषों व स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ ले चुके मरीजों को भी इसमें को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है, ताकि जमीनी स्तर पर वास्तविक समस्याओं की पहचान हो सके।
बैठकें आयोजित करें समितियां
आबिटकर ने निर्देश दिए कि सभी समितियां नियमित बैठके आयोजित करें, स्थानीय समस्याओं पर ठोस कार्ययोजना बनाएं और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करें। उन्होंने यह भी कहा कि सदस्यों का प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण सुनिश्चित किया जाएगा जिससे समितियां अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकें।
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जनप्रतिनिधियों से की अपील
मंत्री आबिटकर ने सांसदों, विधायकों, नगरसेवकों, जिला परिषद, ग्राम पंचायत सदस्यों सहित सभी जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से इस प्रक्रिया में सक्रिय सहभागिता की अपील की। उनका कहना था कि जनभागीदारी के माध्यम से ही स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा सकता है और इससे आम नागरिकों का स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा और सुदृढ़ होगा।
