महाराष्ट्र बनेगा देश का डेटा सेंटर हब, फडणवीस सरकार ने 20 ग्रीन डेटा सेंटर पार्कों को दी मंजूरी
Maharashtra Green Data Center Policy: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य को देश का प्रमुख डेटा सेंटर हब बनाने के लिए नई नीति लागू की है। ग्रीन डेटा सेंटर पार्कों की संख्या 3 से बढ़ाकर 20 कर दी गई है।
- Written By: अपूर्वा नायक
Devendra Fadnavis (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Maharashtra Green Data Center Policy News: महाराष्ट्र को देश का अग्रणी डेटा सेंटर हब बनाने की दिशा में राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बड़ा कदम उठाया है। मुंबई को ‘डेटा सेंटर कैपिटल ऑफ इंडिया’ के रूप में विकसित करने के लक्ष्य के साथ सरकार ने हरित डेटा सेंटर पाकों की संख्या तीन से बढ़ाकर 20 कर दी है।
नई संशोधित नीति के तहत 60,000 करोड़ रुपए या उससे अधिक निवेश वाली परियोजनाओं को 75 प्रतिशत तक प्रोत्साहन अनुदान और 20 वर्षों तक बिजली सब्सिडी का लाभमिलेगा, जिससे राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार सृजन का मार्ग प्रशस्त होगा।
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य को देश का अग्रणी डेटा सेंटर हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए हरित एकीकृत डेटा सेंटर पार्क नीति में व्यापक संशोधन किए हैं। उद्योग, ऊर्जा, श्रम एवं खनिकर्म विभाग द्वारा 9 जून को जारी शासन निर्णय के अनुसार अब राज्य में हरित एकीकृत डेटा सेंटर पाकों की संख्या बढ़ाकर 20 कर दी गई है। साथ ही नीति का दायरा मुंबई महानगर क्षेत्र तक सीमित रखने के बजाय पूरे महाराष्ट्र में विस्तारित किया गया है।
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सरकार का लक्ष्य मुंबई और नवी मुंबई को डेटा सेंटर हब के रूप में विकसित करते हुए मुंबई को डेटा सेंटर कैपिटल ऑफ इंडिया बनाना है। यह निर्णय विकसित महाराष्ट्र-2047 कार्यक्रम के तहत हरित ऊर्जा आधारित 30 से 40 गीगावाट क्षमता वाले डेटा सेंटर विकसित करने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
संशोधित नीति में निवेशकों को कई नई रियायतें
- सरकार का मानना है कि केवल तीन डेटा सेंटर पार्कों के माध्यम से यह लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं था। संशोधित नीति के तहत निवेशकों को कई नई रियायतें और प्रोत्साहन दिए गए है।
- मुख्य डेटा सेंटर गतिविधियों के लिए शत प्रतिशत हरित ऊर्जा उपयोग की अनिवार्यता को घटाकर 51 प्रतिशत कर दिया गया है।
इसके अलावा 30,000 करोड़ रुपए निवेश वाले डेटा सेंटर पार्कों को 10 वर्षों तक प्रति यूनिट एक रुपए की बिजली दर रियायत दी जाएगी, जबकि 60,000 करोड़ रुपए या उससे अधिक निवेश वाली परियोजनाओं को 20 वर्षों तक समान दर से बिजली सब्सिडी मिलेगी।
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राज्य में हजारों करोड़ के निवेश होंगे आकर्षित
शासन ने स्पष्ट किया है कि ये सभी संशोधन और प्रोत्साहन उन परियोजनाओं पर भी लागू होंगे, जिन्हें पहले ही आशय पत्र (एलओआई) जारी किए जा चुके हैं। साथ ही भविष्य में मंजूर होने वाली परियोजनाओं पर भी इनका लाभ मिलेगा। सरकार को उम्मीद है कि इस निर्णय से राज्य में हजारों करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित होगा और बड़े पैमाने घर रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा।
मुंबई से नवभारत लाइव के लिए धीरेंद्र उपाध्याय की रिपोर्ट
