Maharashtra Fake Babas News: पिछले जन्म में तुम राधा थीं, मैं कृष्ण था, इस जन्म में हमारी मुलाकात हुई है। इस तरह के कथन बोलकर कथित पूजा के नाम पर ढोंगी अशोक खरात ने कई महिलाओं का यौन शोषण किया।
वसई जैसे क्षेत्रों में मैं महादेव का अवतार हूं कहकर महिलाओं का शोषण करने वाला ऋषिकेश वैद्य नाम के ढोंगी बाबा का भी मामला हाल ही में उजागर हुआ है। महाराष्ट्र के 36 जिलों में पुलिस थानों में लगभग 1,500 से अधिक ढोंगी बाबाओं की घटनाएं दर्ज हैं। कुछ जिलों में 491 घटनाओं की रिपोर्टें मिली हैं, जिनमें 1,806 आरोपी शामिल हैं। यह जानकारी महाराष्ट्र अंनिस के लातूर के वरिष्ठ कार्यकर्ता माधव वावगे और राज्य कार्याध्यक्ष संजय बनसोडे ने दी।
बच्चों का शोषण कुछ साल पहले मिरज में एक पिता ने अपने 10 वर्षीय बच्चे को तंत्र मंत्र के लिए उकसाया। उसने इसे बाल महाराज नाम दिया और लोगों से पैसे कमाने का धंधा चलाया। अंनिस ने इसे उजागर किया, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
कोल्हापुर में हादसा गुरव बंधुओं ने कई लोगों की आंखों में चोट पहुंचाई, कई लोगों की आंखें चली गईं। शिकायतकर्ताओं के असहयोग के कारण ढोंगी बाबा हो जाते बरीमाधव वावगे ने बातया कि ज्यादातर मामलों में राजनीतिक दबाव, पुलिस का असहयोग और शिकायतकर्ता की अनुपस्थिति के कारण ढोंगी बाबा अदालतों से बरी हो जाते हैं।
सांगली जिले में एक मुस्लिम ढोंगी बाबा ने एक विवाहित महिला का इलाज के नाम पर बलात्कार किया। महिला ने अंनिस के पास शिकायत दर्ज कराई। समिति ने महिला को पूर्ण कानूनी सहायता दी और भोंदू के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की। इस मामले में जादूटोना विरोधी कानून के तहत सात साल की सजा सुनाई गई। यह कानून के तहत पहली सजा मानी जाती है, जैसा डॉ. प्रदीप पाटिल ने बताया।
शासन की उदासीनताजादूटोना विरोधी कानून पारित होने के बाद 2014 में जनजागरूकता और प्रवर्तन के लिए क्रियान्वयन समिति बनाई गई। इसमें राज्य और जिला स्तर पर समितियां नियुक्त करने के आदेश दिए गए थे। लेकिन 12 साल में समिति ने कोई ठोस काम नहीं किया। अंनिस ने बारबार आवाज उठाई और अंततः 2024 में हर पुलिस थाने में एक सतर्कता कक्ष स्थापित करने का अध्यादेश आया।
धोखाधड़ी के शिकार लोगों की शिकायतों के बावजूद ढोंगी बाबा को छोड़ा गया। वास्तव में, सभी सबूत देने के बाद भी पुलिस को स्वयं मामले दर्ज करने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अंनिस की लगातार मांगों के बावजूद कई जिलों में जिला स्तर की समितियां अभी भी नहीं बनाई गई हैं।