

महानिर्मिती और MSRDC के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते से महाराष्ट्र के बुनियादी ढांचे को नई गति मिलेगी।
राजमार्गों के निर्माण में थर्मल पावर स्टेशनों से निकलने वाली 6.17 करोड़ मीट्रिक टन राख का उपयोग होगा।
इस मेगा प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ केंद्र सरकार की राख नीति को लागू करना है।
Mahagenco MSRDC MOU For 6.17 Crore Ton Fly Ash: महाराष्ट्र में पर्यावरण संरक्षण और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का एक बेहतरीन उदाहरण देखने को मिल रहा है। राज्य के थर्मल पावर स्टेशनों से निकलने वाली फ्लाई ऐश का टिकाऊ उपयोग कर बुनियादी ढांचे को गति देने के लिए महानिर्मिती (Mahagenco) और महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) के बीच एक महत्वपूर्ण MoU पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
यह ऐतिहासिक करार ऊर्जा राज्य मंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर की गरिमामयी मौजूदगी में संपन्न हुआ।
इस समझौते पर महानिर्मिती के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक राधाकृष्णन बी. और MSRDC के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अनिलकुमार बी. गायकवाड ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर महानिर्मिती के निदेशक (प्रकल्प) अभय हरणे, कार्यकारी निदेशक (पर्यावरण) डॉ. नितिन वाघ तथा एमएसआरडीसी के मुख्य महाप्रबंधक (पर्यावरण) नरेंद्र टोके सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इस समझौते के तहत जनवरी 2027 से दिसंबर 2028 की अवधि में पूर्वी महाराष्ट्र में प्रस्तावित विभिन्न एक्सप्रेसवे और खनिज परिवहन मार्गों के निर्माण के लिए 6.17 करोड़ मीट्रिक टन राख का उपयोग करने का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजनावार राख की अनुमानित आवश्यकता है-
नागपुर–चंद्रपुर एक्सप्रेसवे: 2.79 करोड़ मीट्रिक टन राख।
नागपुर–गोंदिया एक्सप्रेसवे: 2.09 करोड़ मीट्रिक टन राख।
भंडारा–गडचिरोली एक्सप्रेसवे: 1.14 करोड़ मीट्रिक टन राख।
नवेगांव मोरे–सुरजागढ़ खनिज परिवहन मार्ग: 0.15 करोड़ मीट्रिक टन राख।
इस महा-परियोजना के लिए राख मुख्य रूप से महानिर्मिती के तीन प्रमुख थर्मल पावर स्टेशनों (कोराडी, खापरखेड़ा और चंद्रपुर) से उपलब्ध कराई जाएग।
नागपुर क्षेत्र के प्रोजेक्ट्स के लिए कोराडी और खापरखेड़ा थर्मल पावर स्टेशन से राख मिलेगी।
चंद्रपुर क्षेत्र के प्रोजेक्ट्स के लिए चंद्रपुर थर्मल पावर स्टेशन से आपूर्ति की जाएगी।
प्रोजेक्ट्स की तकनीकी जरूरतों, प्रत्यक्ष स्थल स्थिति और उपलब्धता के अनुसार राख के इस्तेमाल की मात्रा में बदलाव किया जा सकता है। इसके अलावा, राख के परिवहन, उठाने की समयसारणी, वित्तीय सहायता और आपूर्ति शर्तों को अंतिम रूप देने के लिए संबंधित थर्मल पावर स्टेशन, एमएसआरडीसी और ठेकेदारों के बीच स्वतंत्र त्रिपक्षीय करार किए जाएंगे।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार की 31 दिसंबर 2021 की राख अधिसूचना के अनुसार 100% राख उपयोग के लक्ष्य को हासिल करना तथा राज्य सरकार की 19 सितंबर 2025 की राख उपयोग नीति को लागू करना है। थर्मल पावर स्टेशनों में जमा पुरानी राख का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने से दीर्घकालिक भंडारण के कारण होने वाले पर्यावरणीय व परिचालन संबंधी जोखिम काफी हद तक कम होंगे।
यह समझौता 31 मार्च 2032 तक या संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के पूरा होने तक (जो भी पहले हो) प्रभावी रहेगा। दोनों प्राधिकरणों की सहमति से इसकी अवधि को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।