CM फडणवीस की चेतावनी बेअसर, कार्रवाई के डर से नहीं झुके कर्मचारी, दूसरे दिन भी 17 लाख कर्मियों का हल्लाबोल
Government Employee Strike: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की 'नो वर्क-नो पे' और कार्रवाई की चेतावनी के बावजूद महाराष्ट्र के 17 लाख सरकारी कर्मचारियों का आंदोलन जारी है। दफ्तरों में कामकाज ठप।
- Written By: गोरक्ष पोफली
देवेंद्र फडणवीस (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Government Employees Strike: पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली को लेकर महाराष्ट्र के सरकारी कर्मचारियों (Government Employees) और सरकार के बीच चल रही तकरार अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा कल दी गई सख्त चेतावनी का कर्मचारियों पर कोई असर होता नहीं दिख रहा है। सरकार की ओर से ‘नो वर्क-नो पे’ और अनुशासनात्मक कार्रवाई की धमकी के बावजूद, आज दूसरे दिन भी राज्य के 17 लाख सरकारी और अर्ध-सरकारी कर्मचारी सड़कों पर हैं।
चेतावनी के बावजूद नहीं लौटे काम पर
कल मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया था कि हड़ताल से आम जनता को होने वाली परेशानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और हड़ताली कर्मियों पर मेस्मा (MESMA) और अनुशासनहीनता के तहत कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, कर्मचारी संगठनों ने इस चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए अपना आंदोलन और तेज कर दिया है। मंत्रालय से लेकर तहसील कार्यालयों तक, कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण कामकाज पूरी तरह ठप पड़ा है।
5 लाख महिलाओं का नेतृत्व और 23 सूत्रीय मांगें
इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत इसमें शामिल 5 लाख महिला कर्मचारी हैं, जो परिवार और भविष्य की सुरक्षा के लिए पुरानी पेंशन की मांग कर रही हैं। स्टेट गवर्नमेंट एम्प्लॉइज सेंट्रल एसोसिएशन का कहना है कि जब तक सरकार पुरानी पेंशन (OPS), सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष करने और रिक्त पदों को भरने जैसी 23 मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।
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प्रशासनिक मशीनरी ठप, जनता बेहाल
हड़ताल का सबसे गहरा असर स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग पर दिख रहा है। सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं प्रभावित होने से गरीब मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति से शैक्षणिक कार्य भी प्रभावित हुआ है। उधर, जिलाधिकारी कार्यालयों के बाहर बड़ी संख्या में जमा होकर कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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सरकार बनाम कर्मचारी
एक तरफ सरकार ‘सर्कुलर’ जारी कर काम पर लौटने का दबाव बना रही है, तो दूसरी तरफ कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर ‘आर-पार’ के मूड में हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जल्द ही बीच का रास्ता नहीं निकालते, तो यह हड़ताल राज्य की अर्थव्यवस्था और कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
फिलहाल बारामती उपचुनाव और राज्य की अन्य राजनीतिक गतिविधियों के बीच, यह हड़ताल सरकार के लिए गले की हड्डी बन गई है। चेतावनी बेअसर होने के बाद अब प्रशासन के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हैं।
