महाराष्ट्र में बिजली दरों पर सियासत तेज, कांग्रेस का दावा-16% तक महंगी होगी बिजली
Electricity Tariff: महाराष्ट्र में बिजली दरों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने दावा किया है कि सरकार के सस्ती बिजली के वादों के बावजूद दरें बढ़ सकती हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
महावितरण (सौ. सोशल मीडिया )
Maharashtra Electricity Tariff Hike: महाराष्ट्र में बिजली दरों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अतुल लोंढे ने दावा किया है कि राज्य में बिजली सस्ती होने के बजाय महंगी होने जा रही है। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की है।
महावितरण के प्रस्ताव पर उठे सवाल
लोंढे के अनुसार, महावितरण ने महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग के समक्ष बिजली दरों में 20 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। इस संबंध में नागपुर में सार्वजनिक सुनवाई भी आयोजित की गई थी। उनका आरोप है कि इस फैसले से आम उपभोक्ताओं और छोटे-मध्यम उद्योगों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।
सरकार के वादों पर विपक्ष का हमला
कांग्रेस ने सरकार को याद दिलाया कि पहले बिजली दरें कम करने का वादा किया गया था। विपक्ष का कहना है कि वास्तविक स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित बदलावों से बिजली उपभोक्ताओं की लागत बढ़ सकती है।
सम्बंधित ख़बरें
मुंबई: चेंबूर स्कूल बस हादसे के बाद BMC का बड़ा एक्शन! तीन अधिकारी निलंबित, 8 दिन में जांच रिपोर्ट
Kark Sankranti 2026: जुलाई में कब है कर्क संक्रांति? नोट करें डेट, पुण्य और महापुण्य काल
Maharashtra Weather: आज पूरे राज्य में सक्रिय होगा मानसून, घर से निकलने से पहले जानें मौसम का मिजाज
4 मर्डर करके आया हूं… अगला नंबर तुम्हारा है, पनवेल-CSMT लोकल में नशेड़ी का तांडव, देखें वायरल VIDEO
अन्य राज्यों से तुलना का मुद्दा
लोंढे ने पड़ोसी राज्यों के बिजली टैरिफ का उदाहरण देते हुए कहा कि गुजरात, कर्नाटक और तेलंगाना में घरेलू बिजली दरें अपेक्षाकृत कम हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उत्पादन लागत समान है, तो महाराष्ट्र में बिजली महंगी क्यों है।
ये भी पढ़ें :- महाराष्ट्र में जमीन उपयोग नियमों में बड़ा बदलाव, अब एनए अनुमति के लिए कलेक्टर की मंजूरी जरूरी नहीं
सरकारी प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल सरकार की ओर से इस विषय पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम दरें नियामक आयोग की मंजूरी के बाद ही तय होंगी। वहीं उपभोक्ता और उद्योग जगत इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं।
