

Maharashtra Drought Relief: राज्य सरकार ने प्रदेश की उन 265 तहसीलों में पात्र लाभार्थियों को मुफ्त अनाज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है, जहां सूखे का 'ट्रिगर-1' लागू किया गया है।
खाद्य आपूर्ति व उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एक्ट, 2013 के तहत केंद्र सरकार के तय लक्ष्य लिमिट के अंदर पात्र लाभार्थियों को मुफ्त राशन दिया जाता है।
राज्य की 265 सूखा प्रभावित तहसीलों में इस योजना के लाभार्थियों को बिना विलंब अनाज देने के निर्देश दिए गए हैं। यदि योजना में शामिल नहीं लोग भी मुफ्त अनाज की मांग करते हैं, तो उन्हें तय क्राइटेरिया, आय और उपलब्ध कोटे के अंदर अंत्योदय अन्न योजना या प्राथमिक परिवार कैटेगरी में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
राशन कार्ड पर सभी सदस्यों की आधार सीडिंग पूरी करने और संबंधित लोगों को तुरंत अनाज देने का निर्देश दिया गया है। सूखे के कारण खेत मजदूरों और नागरिकों के स्थलांतर की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए
'वन नेशन वन राशन कार्ड' के तहत पोर्टेबिलिटी सुविधा को सख्ती से लागू करने के आदेश दिए गए हैं। पात्र प्रवासी लाभार्थी दुकानों से अनाज ले सकेंगे। संबंधित अधिकारियों को तय समय में अनाज की लिफ्टिंग और डिस्ट्रीब्यूशन पूरा करने के लिए पहले से योजना बनाने कहा गया है।
सूखे की स्थिति के बीच पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता बनाए रखने के लिए नांदेड़ जिला प्रशासन ने फसल अवशेषों की बड़े पैमाने पर खरीद, परिवहन और अनावश्यक औद्योगिक इस्तेमाल पर रोक लगा दी है।
जिलाधिकारी राहुल कर्डिले ने इस संबंध में आदेश जारी किया। प्रशासन ने चारे के रूप में उपयोगी कृषि अवशेषों को उद्योगों में ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करने के बजाय पशुओं के लिए सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।
नांदेड़ की 16 तहसीलों में से 14 तहसीलों को सूखा घोषित किया गया है। इस वर्ष जिले में औसत से कम बारिश हुई है। इसके चलते चारे का उत्पादन प्रभावित हुआ है और आने वाले महीनों में पशुपालकों के सामने चारे की कमी की आशंका बढ़ गई है।
प्रशासन ने पाया कि सोयाबीन के अवशेष, सूखे डंठल, चारा, गन्ने का कचरा, बगास और अन्य कृषि अवशेषों की बड़ी मात्रा में उद्योगों द्वारा खरीद की जा रही थी। इनका इस्तेमाल बायोमास, बायोकोयला और अन्य औद्योगिक प्रक्रियाओं में ईंधन के रूप में किया जा रहा था।