CM फडणवीस के साथ उद्धव ठाकरे (File Photo)
Mumbai News: राजनीति में ऐसे मौके कम ही देखने को मिलते हैं जब सत्ता पक्ष और विपक्ष किसी मुद्दे पर एक साथ खड़े नजर आते हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में ऐसा ही एक दुर्लभ अवसर सामने आया है, जब शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे महायुति सरकार के समर्थन में दिखाई दिए हैं। मामला जबरन धर्मांतरण के खिलाफ प्रस्तावित कानून का है, जिस पर शिवसेना (यूबीटी) ने सरकार का साथ दिया है।
सोमवार को यह विधेयक पेश करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र में प्रस्तावित धर्मांतरण विरोधी कानून किसी विशेष धर्म के खिलाफ नहीं है। इसका उद्देश्य केवल जबरदस्ती, धोखे या लालच देकर किए जाने वाले धर्मांतरण को रोकना है।
13 मार्च को पेश किए गए ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026’ में शादी के नाम पर किए गए अवैध धर्मांतरण के मामलों में 7 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। फडणवीस ने बताया कि इस कानून के तहत केवल उन्हीं शादियों को अदालत द्वारा रद्द किया जा सकेगा, जिनका उद्देश्य गैर-कानूनी धर्मांतरण साबित होगा। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ित व्यक्ति या उसके करीबी रिश्तेदार शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जबकि कुछ मामलों में पुलिस भी स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई कर सकती है।
इस विधेयक को विपक्षी दल शिवसेना (यूबीटी) का समर्थन मिलना खास माना जा रहा है। पार्टी के विधायक भास्कर जाधव ने कहा कि इस कानून का उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना और गैर-कानूनी धर्मांतरण को रोकना है।
उन्होंने कहा कि हर धर्म में कुछ ऐसी प्रथाएं होती हैं जो मानवाधिकारों को प्रभावित करती हैं, और इस तरह के कानून का मकसद ऐसी प्रथाओं पर कानूनी नियंत्रण स्थापित करना है। जाधव ने विधेयक लाने के लिए मुख्यमंत्री और सरकार को बधाई भी दी, साथ ही यह अपील की कि कानून लागू करते समय किसी भी धर्म को विशेष रूप से निशाना न बनाया जाए।
हालांकि उन्होंने यह चिंता भी जताई कि प्रस्तावित विधेयक में अपनी बेगुनाही साबित करने की जिम्मेदारी आरोपी पर डाली गई है। उनके मुताबिक आरोप लगाने वाले पक्ष को ही सबूत पेश करने की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट किया कि यदि किसी को डराकर, धमकाकर या लालच देकर धर्म परिवर्तन कराया जाता है, तो कानून को ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें इस विधेयक के मूल उद्देश्य से कोई आपत्ति नहीं है।
साथ ही ठाकरे ने एक राजनीतिक सवाल भी उठाया। उन्होंने कहा कि अगर धर्म बदलवाने के लिए ‘डर’ का इस्तेमाल गलत है, तो राजनीति में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीबीआई का डर दिखाकर नेताओं से ‘दल बदल’ करवाना भी गलत है, और इसके खिलाफ भी सख्त कानून होना चाहिए।
उन्होंने राज्य की राजनीति में एक और मुद्दा उठाते हुए विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर से दोनों सदनों में नेता प्रतिपक्ष (LoP) नहीं होने पर सवाल किए। ठाकरे ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था की बड़ी विफलता बताया। उनका कहना था कि इतिहास में शायद पहली बार ऐसा हुआ है जब दोनों सदनों में नेता प्रतिपक्ष नहीं है।
जहां शिवसेना (यूबीटी) ने इस विधेयक का समर्थन किया है, वहीं कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया है। कई विपक्षी विधायकों ने मांग की है कि इस बिल को विस्तृत चर्चा के लिए विधानसभा की संयुक्त चयन समिति के पास भेजा जाए।
कांग्रेस विधायक नितिन राउत और अन्य विपक्षी नेताओं ने आशंका जताई कि यदि यह कानून पारित हो जाता है तो इससे लोगों द्वारा ‘कानून हाथ में लेने’ की घटनाएं बढ़ सकती हैं। कांग्रेस विधायक असलम शेख ने कहा कि यह विधेयक संविधान और व्यक्तिगत निजता के अधिकार को प्रभावित कर सकता है।
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उनके मुताबिक यदि दो बालिग अपनी मर्जी से शादी करना चाहते हैं, तो इस कानून के तहत कोई तीसरा व्यक्ति या रिश्तेदार उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकता है। समाजवादी पार्टी के विधायक अबु आसिम आजमी ने भी इस विधेयक का कड़ा विरोध किया। उनके सहयोगी रईस शेख का कहना है कि यह बिल संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन करता है।