महाराष्ट्र में धर्मांतरण विरोधी कानून को कैबिनेट की मंजूरी; नितेश राणे बोले- अब जबरन धर्म परिवर्तन पर होगी जेल
Maharashtra Anti-conversion Bill: महाराष्ट्र कैबिनेट ने धर्मांतरण विरोधी विधेयक को मंजूरी दे दी है। मंत्री नितेश राणे ने कहा कि अब जबरन धर्मांतरण और 'लव जिहाद' करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
- Written By: आकाश मसने
नितेश राणे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nitesh Rane On Anti-Conversion Bill: महाराष्ट्र की राजनीति और सामाजिक व्यवस्था के लिहाज से आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ है। राज्य कैबिनेट ने एक अत्यंत सक्षम और कड़क धर्मांतरण विरोधी कानून (Anti-Conversion Bill) को मंजूरी दे दी है। भारतीय जनता पार्टी के विधायक और फडणवीस सरकार में मंत्री नितेश राणे ने विधानभवन के बाहर मीडिया से बात करते हुए इस फैसले का जोरदार स्वागत किया और इसे राज्य के लिए एक ऐतिहासिक दिन करार दिया।
क्या बोले नितेश राणे?
नितेश राणे ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि ‘हमारे देवा भाऊ (देवेंद्र फडणवीस) के महाराष्ट्र में अब हिंदुत्ववादी विचारधारा के कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों का संघर्ष रंग लाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नया कानून न केवल मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों के कानूनों के समान है, बल्कि कुछ मायनों में उनसे भी अधिक सक्षम और कठोर बनाया गया है। इस कानून के लागू होने के बाद, महाराष्ट्र में किसी का भी जोर-जबरदस्ती या प्रलोभन देकर धर्मांतरण करना एक गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आएगा और दोषियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाएगा।’
विधेयक में क्या है प्रावधान?
नितेश राणे ने विधेयक के प्रावधानों पर चर्चा करते हुए बताया कि अक्सर क्रिश्चियन मिशनरियों और अन्य समूहों द्वारा आर्थिक मदद, स्वास्थ्य सेवाओं या शिक्षा की आड़ में सामूहिक धर्मांतरण के आरोप लगते रहे हैं। अब इस कानून के जरिए ऐसी गतिविधियों पर नकेल कसी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस कानून में ‘घर वापसी’ के लिए भी विशेष प्रावधान और मार्ग खुले रखे गए हैं, ताकि जो लोग स्वेच्छा से अपने मूल हिंदू धर्म में वापस आना चाहते हैं, उन्हें पूरी सरकारी मदद और सुरक्षा प्रदान की जा सके।
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लव जिहाद रोकना मुख्य उद्देश्य
इस कानून का एक मुख्य केंद्र ‘लव जिहाद‘ को रोकना भी है। राणे ने जोर देकर कहा कि हमारी माताओं और बहनों को धोखे में रखकर उनका धर्मांतरण किया जाता है, जिसे रोकने के लिए यह कानून एक ढाल की तरह काम करेगा। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा, “अब महाराष्ट्र में किसी की भी धर्मांतरण करने की हिम्मत नहीं होगी”। संवैधानिक वैधता के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि कैबिनेट में इस पर गहराई से चर्चा हुई है और यह कानून पूरी तरह से संवैधानिक चौखट के भीतर है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय का भी समर्थन प्राप्त है।
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इसी प्रेस वार्ता के दौरान, राणे ने बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा हवाई अड्डे जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में खुले में नमाज पढ़ने की याचिका को खारिज करने के फैसले का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से हाई कोर्ट का यह फैसला सही है और सार्वजनिक स्थानों के बजाय मस्जिदों का उपयोग प्रार्थना के लिए किया जाना चाहिए। राणे ने यहां तक सुझाव दिया कि यदि सार्वजनिक स्थलों पर ही नमाज पढ़नी है, तो मस्जिदों के स्थान का उपयोग स्कूलों या अन्य संस्थानों के लिए किया जाना चाहिए।
