महाराष्ट्र विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान दोनों सदनों को संबोधित करते राज्यपाल आर्चाय देवव्रत (सोर्स: सोशल मीडिया)
Governor Acharya Devvrat Speech: महाराष्ट्र विधानमंडल का बजट सत्र 2026 सोमवार को एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व राजनीतिक परिस्थिति के बीच शुरू हुआ। सत्र की शुरुआत राज्यपाल आचार्य देवव्रत द्वारा दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करने के साथ हुई। सदन की कार्यवाही ‘वंदे मातरम’, ‘राष्ट्रगान’ और राज्य गीत ‘जय जय महाराष्ट्र माझा’ की गूंज के साथ शुरू हुई। राज्यपाल ने अपने संबोधन की शुरुआत मराठी में की और बाद में वे हिंदी में बोलने लगे।
महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र 2026 के लिए मुंबई स्थित विधानसभा परिसर पहुंचने पर महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत का मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वागत किया। इस मौके पर गवर्नर को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ भी दिया गया।
📍 विधानभवन, मुंबई
महाराष्ट्राचे राज्यपाल आचार्य देवव्रत यांचे विधिमंडळाच्या ‘अर्थसंकल्पीय अधिवेशन २०२६’ साठी येथे आगमन झाले. यावेळी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी त्यांचे स्वागत केले. यावेळी राज्यपालांना ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देण्यात आला.#अर्थसंकल्पीयअधिवेशन… pic.twitter.com/EpqjROYCj8 — MAHARASHTRA DGIPR (@MahaDGIPR) February 23, 2026
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने अपने अभिभाषण में महायुति सरकार की उपलब्धियों और ‘विकसित महाराष्ट्र 2047’ के रोडमैप पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र देश की जीडीपी में लगभग 13.5 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। वर्ष 2024-25 में राज्य को 1.64 लाख करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्राप्त हुआ, जो देश के कुल एफडीआई प्रवाह का 39 प्रतिशत है।
📍 विधानभवन, मुंबई
महाराष्ट्र विधानमंडळाच्या ‘अर्थसंकल्पीय अधिवेशन २०२६’मधील दोन्ही सभागृहांच्या संयुक्त बैठकीत राज्यपाल महोदयांचे अभिभाषण झाले.#अर्थसंकल्पीयअधिवेशन#अर्थसंकल्पीयअधिवेशन२०२६#MahaBudgetSession#MahaBudgetSession2026 @ADevvrat pic.twitter.com/qF012PSg0l — MAHARASHTRA DGIPR (@MahaDGIPR) February 23, 2026
सरकार ने राज्य की अर्थव्यवस्था को 2047 तक 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक विस्तारित करने का लक्ष्य रखा है। इस विजन के हिस्से के रूप में, सरकार का लक्ष्य 2030 तक 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित करना और लगभग 50 लाख रोजगार के अवसर पैदा करना है। जनवरी 2026 में दावोस में हुए विश्व आर्थिक मंच के दौरान लगभग 30 लाख करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिनसे 40,000 नौकरियां पैदा होने की संभावना है।
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राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार राजमाता जीजाऊ, छत्रपति शिवाजी महाराज, डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर और भगवान बिरसा मुंडा जैसे समाज सुधारकों के आदर्शों से निर्देशित होगी। उन्होंने महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद को हल करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार में पूरा सहयोग दिया जा रहा है और सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रसिद्ध वकीलों को नियुक्त किया गया है।
इस बजट सत्र की सबसे खास और पहली बार होने वाली बात यह है कि राज्य के इतिहास में पहली बार विधानसभा और विधान परिषद दोनों में ‘विपक्ष का नेता’ (LoP) नहीं है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि विपक्षी गठबंधन सदन में इस पद के लिए आवश्यक न्यूनतम संख्या बल हासिल करने में विफल रहा। महा विकास अघाड़ी (MVA) ने इस स्थिति को लोकतांत्रिक मानदंडों के लिए खतरा बताया है, उनका तर्क है कि संस्थागत संतुलन बनाए रखने के लिए विपक्ष के नेता की उपस्थिति महत्वपूर्ण होती है।