महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री दादा भुसे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Exam Center Recognition Cancelled: महाराष्ट्र में आगामी बोर्ड परीक्षाओं की शुचिता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने एक बेहद कड़ा और अभूतपूर्व कदम उठाया है। 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के दौरान नकल और अन्य कदाचार के विरुद्ध बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए, सरकार ने राज्य भर में कुल 107 परीक्षा केंद्रों की मान्यता तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है।
विधानसभा में बड़ी घोषणा शुक्रवार को राज्य विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान, महाराष्ट्र के स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने इस कड़ी कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने सदन को बताया कि राज्य सरकार ने पिछले वर्ष की सफलता को देखते हुए, फरवरी-मार्च 2026 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए एक सुरक्षित और निष्पक्ष माहौल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ‘नकल-मुक्त परीक्षा अभियान’ की शुरुआत की है।
महाराष्ट्र के स्कूल शिक्षा मंत्री द्वारा दी गई लिखित जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई कदाचार की घटनाओं की रिपोर्ट मिलने के बाद की गई है। 13 जनवरी के आसपास बोर्ड को कुछ केंद्रों पर अनियमितताओं की जानकारी मिली थी, जिसके बाद गहन समीक्षा की गई। इसके परिणामस्वरूप, कक्षा 10 के 31 परीक्षा केंद्रों और कक्षा 12 के 76 परीक्षा केंद्रों की मान्यता रद्द कर दी गई है। शिक्षा विभाग के इस कदम से उन केंद्रों में हड़कंप मच गया है जो नियमों की अनदेखी कर रहे थे।
परीक्षाओं को फुलप्रूफ बनाने के लिए सरकार ने तकनीक का सहारा लिया है। मंत्री भुसे ने स्पष्ट किया कि कक्षा 10 और 12 के सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। सुरक्षा उपायों को और कड़ा करते हुए उन्होंने कहा कि जिन परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी की सुविधा नहीं है, वहां के अधीक्षकों, निरीक्षकों और अन्य कर्मचारियों को बदल दिया गया है।
मंत्री दादा भुसे ने बताया कि जो केंद्र ‘संवेदनशील’ की श्रेणी में आते हैं, वहां विशेष स्थायी दल तैनात किए गए हैं और ड्रोन के जरिए भी निगरानी रखी जाएगी। जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में जिला स्तरीय सतर्कता समितियों का गठन किया गया है, जिनकी भूमिका और जिम्मेदारी 9 जनवरी को जारी एक सरकारी आदेश के माध्यम से स्पष्ट की जा चुकी है।
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सरकार ने साफ कर दिया है कि नकल करने या करवाने वालों के साथ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। मंत्री ने चेतावनी दी है कि महाराष्ट्र कदाचार रोकथाम अधिनियम के तहत, किसी भी दोषी व्यक्ति के खिलाफ तत्काल संज्ञेय और गैर-जमानती मामला दर्ज करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। यह कानून न केवल नकल करने वाले छात्रों, बल्कि इसे बढ़ावा देने वाले बाहरी व्यक्तियों या परीक्षा केंद्र के कर्मचारियों पर भी समान रूप से लागू होगा।
इस ‘नकल-मुक्त अभियान’ के जरिए महाराष्ट्र सरकार का लक्ष्य राज्य की शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को और मजबूत करना है। अभिभावकों और छात्रों से भी अपील की जा रही है कि वे केवल अपनी मेहनत पर भरोसा करें और किसी भी प्रकार के अनुचित साधनों से दूर रहें।