महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग हुआ सख्त, खून के कारोबार पर कड़ी नजर, राज्यभर में विशेष जांच अभियान

Blood Bank Investigation: महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के 350 से अधिक ब्लड बैंकों की जांच शुरू की है। रिकॉर्ड, स्टॉक, लेनदेन और रक्त वितरण में गड़बड़ी मिलने पर FDA कार्रवाई करेगा।
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ब्लड बैंक ऑडिट- फाइल फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Maharashtra Blood Bank Audit: राज्य में ब्लड बैंकों की कार्यप्रणाली और रक्त के संग्रह, भंडारण और वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। इसके तहत अब राज्यभार में विशेष अभियान चलाकर खून के कारोबार पर बारीकी से नजर रख रहा है। इसी क्रम में राज्य रक्त संक्रमण परिषद के निर्देश पर महाराष्ट्र के 350 से अधिक ब्लड बैंकों के रिकॉर्ड, स्टॉक और लेनदेन की व्यापक जांच शुरू कर दी गई है।

विशेष अभियान के तहत अंतरराज्यीय रक्त हस्तांतरण, रक्त संग्रह और वितरण के मिलान से लेकर राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के पालन तक हर पहलू की पड़ताल की जाएगी। किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर संबंधित ब्लड बैंक के खिलाफ एफडीए कार्रवाई करेगी।

350 से ज्यादा ब्लड बैंकों की खुलेंगी फाइलें

स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. नितिन अंबाडेकर ने बताया कि प्रत्येक जिले का ब्लड ट्रांसफ्यूजन अधिकारी अपने जिले के ब्लड बैंकों की निगरानी करता है और अब उन्हें विस्तृत ऑडिट की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अगले लगभग एक माह तक जारी रह सकती है। उन्होंने बताया कि राज्य में 350 से अधिक ब्लड बैंक संचालित हैं तथा प्रत्येक जिले में औसतन 10 से 12 ब्लड बैंक हैं।

रिकॉर्ड, स्टॉक और लेनदेन की होगी जांच

जांच के दौरान यह भी परखा जाएगा कि ब्लड बैंकों में रक्त संग्रह और वास्तविक वितरण का रिकॉर्ड मेल खाता है या नहीं, ई-ब्लड बैंक डैशबोर्ड पर रक्त भंडार का विवरण नियमित रूप से अपडेट किया गया है या नहीं तथा रक्त और रक्त घटकों के प्रोसेसिंग शुल्क संबंधी सूचना बोर्ड प्रदर्शित किए गए हैं या नहीं। इसके अलावा तकनीकी रूप से योग्य कर्मचारियों की उपलब्धता, रक्त भंडार का नियमित ऑडिट और शिकायतों के निस्तारण की भी समीक्षा की जाएगी।

एफडीए को कार्रवाई का दिया गया अधिकार

ब्लड ट्रांसफ्यूजन अधिकारियों को किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर एफडीए को रिपोर्ट भेजने का अधिकार भी दिया गया है। एफडीए ही ब्लड बैंकों का लाइसेंस जारी करने वाली प्राधिकृत संस्था है। उल्लेखनीय है कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स अधिनियम, 1940 के तहत रक्त को औषधि की श्रेणी में रखा गया है। इसलिए इसके संग्रह, प्रसंस्करण, भंडारण और वितरण में गुणवत्ता, सुरक्षा तथा पारदर्शिता बनाए रखना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

तीन सदस्यीय समिति गठित

इसी बीच स्वास्थ्य विभाग ने राज्यभर में ब्लड बैंकों के औचक निरीक्षण के लिए तीन सदस्यीय समितियों का भी गठन किया है। इन समितियों में दो चिकित्सा अधिकारी, एक लेखा अधिकारी और आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारी भी शामिल किए जाएंगे।

गड़बड़ी पर एफडीए की कार्रवाई

स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. नितिन अंबाडेकर ने कहा कि प्रत्येक जिले का ब्लड ट्रांसफ्यूजन अधिकारी अपने जिले के सभी ब्लड बैंकों का ऑडिट कर रहा है। यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अगले लगभग एक महीने तक जारी रहेगी। जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर संबंधित मामले की रिपोर्ट एफडीए को भेजी जाएगी।

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