Maharashtra ATS Radicalisation Case: महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) ने राज्यभर में 10 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों को कट्टरपंथी विचारधारा में ढालने के आरोप में, एक कट्टरपंथी संगठन से जुड़े छह नामजद और कई अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एटीएस के अनुसार, यह संगठन सुनियोजित प्रशिक्षण शिविरों और वैचारिक सत्रों के जरिए एक समर्पित श्बाल शाखार (चाइल्ड विंग) तैयार करने का प्रयास कर रहा था।
ग्रीष्मकालीन शिविरों के नाम पर गुमराह करने का आरोप जांच एजेंसी ने अहिल्यानगर और यवतमाल जिलों में की गई छापेमारी के दौरान जब्त डिजिटल उपकरणों, (मोबाइल, लैपटॉप, हार्ड डिस्क) के फोरेंसिक विश्लेषण के आधार पर यह एफआईआर दर्ज की है।
जांचकर्ताओं का आरोप है कि यवतमाल के पुसाद में अभिभावकों को 'धार्मिक शिक्षा' का झांसा देकर ग्रीष्मकालीन इस्लामी शिविर आयोजित किए गए थे। इन शिविरों में बच्चों के चुनिंदा समूहों को अलग-थलग रखकर उन्हें कट्टरपंथी और राष्ट्र-विरोधी सामग्री दिखाई जाती थी।
एटीएस का दावा है कि इन शिविरों में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोपित और प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े लोग शामिल थे। यह समूह सार्वजनिक रूप से खुद को एक सामाजिक-शैक्षणिक युवा मंच बताता था। जबकि वास्तव में यह गहरे स्तर पर कट्टरता फैलाने का मुखौटा था। फिलहाल एटीएस इस नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन, संचार साधनों और यात्रा रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है।
एफआईआर के अनुसार, बरामद वीडियो फुटेज से खुलासा हुआ है कि, बच्चों से अत्यधिक ध्रुवीकरण वाले रोल प्ले अभ्यास कराए जाते थे। इनमें इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष और बाबरी मस्जिद विध्वंस जैसे संवेदनशील मुद्दों पर आधारित, नाटक तैयार करवाकर बच्चों को उकसाने और सांप्रदायिक रूप से प्रभावित करने की कोशिश की जाती थी।
इसके साथ ही शिविरों में प्रतीकात्मक हथियारों के साथ शारीरिक प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए जाते थे।