मैं आदेश देता हूं… विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर ने पूर्व सांसद को धमकाया, Video से मचा हड़कंप
Rahul Narvekar News: मुंबई के कोलाबा से बीजेपी विधायक और विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर पर पूर्व सांसद हरिभाऊ राठौड़ को धमकाने और चुनाव प्रक्रिया में दबाव डालने का आरोप लगा। इसका वीडियो सामने आया है।
- Written By: आकाश मसने
फोन पर बात करते विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Rahul Narvekar Viral Video: कोलाबा विधायक और महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर एक नए विवाद के केंद्र में हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, जिसमें वह एक पूर्व सांसद की सुरक्षा हटाने का आदेश देते और उन्हें धमकाते हुए नजर आ रहे हैं।
राहुल नार्वेकर का वीडिया आया सामने
मुंबई के कोलाबा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक राहुल नार्वेकर का एक विवादित वीडियो सामने आया है, जिसे सांसद संजय राउत ने सार्वजनिक किया है। इस वीडियो में नार्वेकर पूर्व सांसद हरिभाऊ राठौड़ के साथ तीखी बहस करते हुए दिखाई दे रहे हैं। सबसे चौंकाने वाला पहलू वह है, जहां नार्वेकर फोन पर पुलिस के संयुक्त आयुक्त (Joint Commissioner of Police) को राठौड़ की सुरक्षा तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्देश दे रहे हैं। वीडियो में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, “आप विधानसभा स्पीकर से क्यों झगड़ा कर रहे हैं?” इस घटना के बाद राठौड़ ने खुलकर नार्वेकर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
सन्मानीय अध्यक्ष महोदय, pic.twitter.com/zl9fJ1CIBa — Sanjay Raut (@rautsanjay61) January 2, 2026
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‘निर्विरोध जीत’ के लिए चुनावी धांधली के आरोप
हरिभाऊ राठौड़ ने नार्वेकर पर सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि स्पीकर राहुल नार्वेकर ने अपने भाई और भाभी की निर्विरोध जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। राठौड़ के अनुसार, नामांकन दाखिल करने के आखिरी दिन नार्वेकर शाम 5 बजे तक चुनाव कार्यालय के अंदर मौजूद रहे ताकि विपक्षी उम्मीदवारों पर दबाव बनाया जा सके।
आरोप है कि वहां मौजूद अधिकारियों ने जानबूझकर समय बर्बाद किया ताकि विपक्षी अपना फॉर्म न भर पाएं। राठौड़ ने दावा किया कि उनके साथ लगभग 12 लोग अपने आवेदनों के साथ खड़े थे, लेकिन नार्वेकर और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कथित दबाव के कारण उनके फॉर्म स्वीकार नहीं किए गए। उन्होंने दुखी होकर पूछा कि क्या आज के दौर में लोगों को स्वतंत्रता से जीने और चुनाव लड़ने का अधिकार है?
पैसे लेकर भी फॉर्म स्वीकार नहीं करने का दावा
विवाद यहीं नहीं थमता, राठौड़ ने आरोप लगाया कि चुनाव अधिकारियों ने उम्मीदवारों से पैसे तो ले लिए लेकिन अंतिम समय में भीड़ और तकनीकी कारणों का हवाला देकर आवेदन लेने से मना कर दिया। उन्होंने मांग की है कि चुनाव आयोग के कैमरों की रिकॉर्डिंग और वहां के सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक किया जाए ताकि पूरी दुनिया के सामने सच्चाई आ सके। उनके अनुसार, नार्वेकर लगातार उन्हें धमका रहे थे और पूछ रहे थे कि वे उनके (नार्वेकर के) खिलाफ नामांकन क्यों दाखिल कर रहे हैं और मुख्यमंत्री के माध्यम से काम क्यों करवा रहे हैं। उन्होंने चुनाव अधिकारी को तत्काल निलंबित करने की भी मांग की है।
मेरी जान को खतरा है: हरिभाऊ राठौड़
पूर्व सांसद हरिभाऊ राठौड़ ने अपनी जान को खतरा बताते हुए कहा कि यदि उन्हें भविष्य में कुछ होता है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों का पता सीसीटीवी फुटेज से चल जाएगा। राठौड़ का कहना है कि जब उन्होंने नार्वेकर को टोकते हुए कहा कि वह एक स्पीकर के बजाय किसी साधारण कार्यकर्ता की तरह व्यवहार कर रहे हैं, तो नार्वेकर आगबबूला हो गए। आरोप है कि नार्वेकर ने राठौड़ के सभी विशेषाधिकार छीनने की धमकी दी। राठौड़ ने जब जवाब दिया कि वह उन्हें फांसी भी दे सकते हैं, तो नार्वेकर ने कथित तौर पर उन्हें चेतावनी देते हुए पूछा कि जब वह अंजाम जानते हैं, तो उनसे झगड़ा क्यों कर रहे हैं। राठौड़ ने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को ऐसा आचरण शोभा नहीं देता।
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राहुल नार्वेकर ने दी सफाई
इन सभी आरोपों के बीच राहुल नार्वेकर ने अपने बचाव में बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें वहां की पूरी घटना विस्तार से याद नहीं है, लेकिन स्थिति यह थी कि शाम के 5 बज चुके थे और नामांकन का समय समाप्त हो गया था। उनके अनुसार, जब उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि क्या वे नए फॉर्म लेंगे, तो अधिकारियों ने समय सीमा खत्म होने की बात कहकर मना कर दिया। नार्वेकर ने आरोप लगाया कि जब वह बाहर आए, तो कुछ लोगों ने उन पर गैर-कानूनी काम करने का दबाव डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि चूंकि वह गलत काम के लिए राजी नहीं हुए, इसलिए अब उनके खिलाफ झूठी अफवाहें फैलाई जा रही हैं।
यह पूरी स्थिति उस दोधारी तलवार की तरह है, जहां एक ओर संवैधानिक मर्यादा का पालन करने की जिम्मेदारी है, तो दूसरी ओर राजनीतिक प्रभाव का उपयोग कर सत्ता पर पकड़ बनाए रखने की चुनौती; और इस खींचतान में अक्सर निष्पक्षता की बलि चढ़ जाती है।
