LPG Crisis: ब्रेकफास्ट के लिए तरसे मुंबईकर, वड़ा पाव-समोसा और इडली-डोसा के स्टॉल हुए बंद

Mumbai LPG Crisis 2026 Breakfast Impact: मुंबई में एलपीजी संकट के कारण इडली-डोसा और वड़ा पाव के स्टॉल बंद हो गए हैं। धारावी में नाश्ता बनाने वाली छोटी इकाइयां गैस न मिलने से ठप पड़ गई हैं।
Mumbai Vada Pav Stall Closed LPG Crisis
Mumbai Vada Pav Stall Closed LPG Crisis (फोटो क्रेडिट-X)
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Mumbai Vada Pav Stall Closed News: मुंबई की रफ्तार और वहां के आम आदमी की पहचान माने जाने वाले वड़ा-पाव और इडली-डोसा पर अब एलपीजी संकट (LPG Crisis) की मार पड़ी है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण मुंबई में घरेलू और कमर्शियल गैस की किल्लत इस कदर बढ़ गई है कि शहर के आधे से ज्यादा नाश्ते के स्टॉल बंद हो गए हैं। सुबह ड्यूटी पर जाने वाले लाखों मुंबईकर, जो ऑफिस पहुंचने से पहले फुटपाथों पर लगने वाले इन स्टॉलों से पेट भरते थे, अब नाश्ते के लिए तरस रहे हैं। जहां स्टॉल खुले भी हैं, वहां कीमतों में भारी बढ़ोतरी की गई है, जिससे आम आदमी की जेब पर दोहरी मार पड़ रही है।

मुंबई का मॉर्निंग नाश्ता मुख्य रूप से धारावी की तंग गलियों में चलने वाली छोटी इंडस्ट्रीज और घरों से आता है। यहां थोक भाव में इडली, वड़ा और सांबर तैयार किया जाता है और फिर उसे पूरे शहर में साइकिलों और हाथगाड़ियों पर बेचा जाता है। लेकिन गैस न मिलने की वजह से धारावी की ये भट्टियां ठंडी पड़ गई हैं। कारोबारियों का कहना है कि वे ब्लैक मार्केट में दोगुनी कीमत देकर भी गैस सिलेंडर नहीं खरीद पा रहे हैं, जिसके कारण उनका पूरा व्यापार ठप हो गया है।

धारावी की 'इडली फैक्ट्री' पर ताला

धारावी की छोटी गलियों में ऐसी कई इकाइयां हैं जहां एक दिन में 1 लाख से ज्यादा इडली बनाई जाती हैं। यहां से सैकड़ों छोटे वेंडर नाश्ता लेकर मुंबई के अलग-अलग कोनों में जाते हैं। एक स्थानीय कारोबारी ने बताया कि गैस की कमी के कारण अब कच्चा माल खराब हो रहा है। भिगोए हुए चावल और उड़द की दाल फर्मेंट होकर झाग (फेन) छोड़ रहे हैं, लेकिन उन्हें पकाने के लिए ईंधन नहीं है। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो इन मजदूरों और छोटे व्यापारियों के पास गांव वापस लौटने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।

दुकान का किराया और पुलिस की सख्ती

छोटे दुकानदारों और अण्णाओं (इडली विक्रेताओं) के सामने समस्या सिर्फ धंधे की नहीं, बल्कि खर्चों की भी है। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि उन्हें उस जगह का किराया भी देना होता है जहां वे स्टॉल लगाते हैं। जब धंधा ही नहीं हो रहा, तो किराया कहां से भरेंगे? दुकानदारों ने बताया कि एक सिलेंडर मुश्किल से 5 दिन चलता है और महीने में कम से कम 6 सिलेंडरों की जरूरत होती है। अब स्थिति यह है कि पुलिस वाले भी आकर कह रहे हैं कि गैस की समस्या है तो धंधा बंद रखें।

वड़ा पाव और समोसा भी हुए महंगे

मुंबई की लाइफलाइन कहा जाने वाला वड़ा पाव भी अब महंगा हो गया है। गैस की किल्लत की वजह से कई बड़े वेंडरों ने उत्पादन घटा दिया है। जो दुकानदार कोयले या इलेक्ट्रिक स्टोव का विकल्प अपना रहे हैं, उनकी लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा असर ग्राहकों की थाली पर पड़ रहा है। मुंबई के रेलवे स्टेशनों और बस डिपो के बाहर मिलने वाले नाश्ते के स्टॉल गायब होने से उन लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं जो सुबह जल्दी घर से निकल जाते हैं और बाहर के नाश्ते पर ही निर्भर रहते हैं।

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