सुप्रीम कोर्ट पहुंचा लीलावती ट्रस्ट मामला, वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर जारी हुआ नोटिस
Lilavati Trust Case Supreme Court Notice: लीलावती ट्रस्ट विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने एचडीएफसी बैंक सीईओ से जवाब मांगा है। मामला कथित वित्तीय अनियमितताओं और ट्रस्ट फंड के दुरुपयोग से जुड़ा है।
- Written By: अपूर्वा नायक
लीलावती ट्रस्ट सुप्रीम कोर्ट केस (सौ. सोशल मीडिया )
Lilavati Trust Case Supreme Court Notice News: देश के चर्चित लीलावती ट्रस्ट विवाद में नया कानूनी मोड़ आ गया है। लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एचडीएफसी बैंक के सीईओ शशिधर जगदीशन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
ट्रस्ट ने उन पर और अन्य संबंधित व्यक्तियों पर ट्रस्ट निधियों के कथित दुरुपयोग, रिश्वतखोरी, वित्तीय साजिश और न्यासी दायित्वों के उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। शीर्ष अदालत का यह कदम बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा एफआईआर रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर आया है, जिससे मामले की कानूनी और सार्वजनिक महत्व की बहस एक बार फिर तेज हो गई है।
देश के चर्चित ट्रस्ट विवाद में अब आया नया मोड़
बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एमएम सुदेश और न्यायमूर्ति नोंगमेइकापम कोटिस्वर सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। ट्रस्ट का आरोप है कि उसके धन के कथित दुरुपयोग, रिश्वतखोरी, वित्तीय साजिश, रिकॉर्ड नष्ट करने और न्यासी दायित्वों के उल्लंघन से जुड़े मामले में निध्यक्ष आपराधिक जांच आवश्यक है।
सम्बंधित ख़बरें
उद्धव ठाकरे ने नागपुर से फूंका राम रक्षा आंदोलन का बिगुल, देखें भक्ति और तेज से भरपूर ये खास तस्वीरें
सरकार को समाधान खोजना था, वे अस्पताल ले गए… भाजपा सरकार पर भड़के कांग्रेस नेता हुसैन दलवई
डॉक्टरों से मारपीट मामला: शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे को बड़ा झटका, बॉम्बे हाई कोर्ट ने रद्द की जमानत
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन: 500 हाथियों जितनी भारी TBM की असेम्बलिंग कर समुद्र के नीचे सुरंग बनाने का काम शुरू
ट्रस्ट के हितों को पहुंचाया गया नुकसान
लीलावती ट्रस्ट ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि पूर्व कथित अवैध ट्रस्टी चेतन मेहता और एचडीएफसी बैंक के शीर्ष अधिकारी की कथित मिलीभगत से ट्रस्ट के हितों को नुकसान पहुंचाया गया, ट्रस्ट का दावा है कि उसके पास ऐसे दस्तावेज और साक्ष्य हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि पूर्व ट्रस्टियों के कार्यकाल के दौरान दो करोड़ रुपए से अधिक की नकद राशि कथित रूप से एचडीएफसी बैंक के एमडी को दी गई थी।
ये भी पढ़ें :- Mumbai Coastal Road: वर्सोवा-दहिसर कोस्टल रोड के लिए 1992 पेड़ हटाने को मंजूरी, पर्यावरण पर छिड़ी बहस
साथ ही ट्रस्ट की बड़ी धनराशि को बैंक की एफडी योजनाओं में निवेश किए जाने से कुछ व्यक्तियों को लाभ पहुंचने के आरोप भी लगाए गए है। गौरतलब है कि 5 मई 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने ट्रस्ट द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर को रद्द कर दिया था।
