Ladki Bahin Yojana: 60 लाख महिलाओं पर लटकी तलवार! किसे मिलेगा पैसा और कौन होगा बाहर?
लाडकी बहिन योजना की नवंबर-दिसंबर किस्त पर संकट गहरा गया है। 60 लाख लाभार्थी महिलाओं ने ई-केवाईसी नहीं कराया, जिससे चुनाव के बाद उनकी किस्त रोकी जा सकती है।
- Written By: आकाश मसने
लाडकी बहिन योजना (सोर्स: सोशल मीडिया)
Ladki Bahin Yojana e-KYC Update: लाडकी बहिन योजना के नवंबर-दिसंबर महीने की किस्त के पैसों का इंतजार कर रही लाखों लाभार्थी महिलाओं को महानगरपालिका चुनाव के बाद बड़ा झटका लग सकता है। लाभार्थी महिलाओं का ई केवाईसी नहीं होना इसकी बड़ी वजह बनेगी। सूत्रों का दावा है कि लगभग 60 लाख लाभार्थी महिलाओं ने सरकारी निर्देश के बाद भी ई-केवाईसी नहीं कराया है। जबकि ई-केवाईसी के लिए दी गई मोहलत 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो गई।
महाराष्ट्र के महायुति सरकार पहले ही घोषणा कर चुकी है कि योजना के तहत पात्र (2.5 लाख रुपए से कम आय वाली) लाभार्थी महिलाओं को ही योजना का लाभ दिया जाएगा। लेकिन ई-केवाईसी नहीं कराने वाली ‘लाडकी बहनों’ को आगे से किस्त का पैसा नहीं मिलेगा।
कितनी महिलाओं को मिला लाडकी बहिन योजना लाभ?
लाडकी बहिन योजना के तहत ढाई लाख रुपए से कम वार्षिक आय वाले परिवारों की दो महिलाओं को सरकार की ओर से हर महीने 1500 रुपए दिए जाते हैं। एक अनुमान के अनुसार, प्रारंभ में लगभग 2.45 करोड़ लाडकी बहनों ने महीनों तक इस योजना का लाभ लिया। बाद में खुलासा हुआ कि लाखों की संख्या में ढाई लाख रुपए से ज्यादा आमदनी वाले परिवार की महिलाओं के साथ-साथ हजारों की संख्या में पुरुषों ने भी योजना का पैसा लिया था। लाभ लेने वालों में हजारों सरकारी कर्मचारी महिलाएं भी शामिल थीं। इस वजह से सरकार को हर महीने करोड़ों रुपए की चपत लगी तथा सरकारी तिजोरी पर भार बढ़ने से दूसरी योजनाएं प्रभावित हुई हैं।
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वित्तीय बोझ घटाने की कवायद
फर्जी लाडलियों के कारण सरकारी तिजोरी पर पड़ने वाले भार को कम करने के लिए सरकार ने लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य कर दिया था। सितंबर में शुरू की गई इस प्रक्रिया के 13 पैरामीटर निर्धारित किए गए हैं। इसके लिए पहले 18 नवंबर तक का समय दिया गया था लेकिन राज्य में अतिवृष्टि एवं अन्य तकनीकी कारणों से बाद में ई-केवाईसी की मोहलत 31 दिसंबर तक बढ़ाई गई थी, जो कि बुधवार को समाप्त हो गई। अब सूत्रों का दावा है कि नवंबर और दिसंबर की किस्तों का इंतजार कर रही लगभग 2.3 करोड़ से ज्यादा पंजीकृत लाभार्थी महिलाओं में से 60 लाख को योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
