

Highlights:
भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन B-28 का निर्माण बेंगलुरु स्थित BEML कारखाने में किया जा रहा है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ट्रेन के निर्माण, तकनीकी प्रक्रियाओं और सुरक्षा मानकों का निरीक्षण किया।
ट्रेन की अधिकतम परीक्षण गति 280 किमी प्रति घंटा और परिचालन गति 249 किमी प्रति घंटा निर्धारित है।
India's First Indigenous Bullet Train: भारत में हाई-स्पीड रेल तकनीक के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। देश की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन ने आकर लेना शुरू कर दिया है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए तैयार हो रही यह ट्रेन आधुनिक तकनीक, भारतीय इंजीनियरिंग और विश्वस्तरीय यात्री सुविधाओं का संगम होगी। ट्रेन सेट का निर्माण कर्नाटक के बेंगलुरु स्थित बीईएमएल (BEML) के कारखाने में किया जा रहा है।
भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन B-28 का निर्माण किया जा रहा है। केंद्रीय रेल मंत्री मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस ट्रेन के निर्माण के दौरान आधुनिक तकनीक और सुरक्षा मानकों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने हाई-स्पीड ट्रेन के निर्माण में इस्तेमाल हो रही आधुनिक मशीनरी, विशेष उपकरणों और तकनीकी प्रक्रियाओं का जायजा लिया।
रेल मंत्री ने कोच के अंडरफ्रेम, साइडवॉल, छत और कार बॉडी असेंबली सहित उत्पादन के विभिन्न चरणों का निरीक्षण किया। उन्होंने ट्रेन की संरचनात्मक मजबूती और स्थिरता जांचने के लिए किए गए ‘स्क्वीज टेस्ट’ का प्रदर्शन भी देखा। इसके अलावा यात्री सीटों, एयर कंडीशनिंग सिस्टम, कपलर और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों की समीक्षा की। साइड मॉड्यूल और रूफ मॉड्यूल के निर्माण एवं उनकी असेंबली प्रक्रिया का भी जायजा लिया।
बुलेट ट्रेन की अधिकतम परीक्षण गति 280 किलोमीटर प्रति घंटा और परिचालन गति 249 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। लगभग 202 मीटर लंबी इस ट्रेन में कुल 8 कोच होंगे, जिनमें चार मोटर कार और चार ट्रेलर कार शामिल हैं। ट्रेन में करीब 557 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होगी। इसमें दिव्यांगजन और सीमित गतिशीलता वाले यात्रियों के लिए विशेष स्थान भी उपलब्ध कराया जाएगा। सात कोच सामान्य श्रेणी के होंगे, जबकि एक कोच एग्जीक्यूटिव क्लास का होगा। सामान्य श्रेणी में 3×2 और एग्जीक्यूटिव क्लास में 2×2 सीटिंग व्यवस्था रहेगी।
भविष्य में दो आठ-कोच वाली ट्रेनों को जोड़कर 16 कोच की ट्रेन भी चलाई जा सकेगी। आराम और सुविधाओं पर विशेष ध्यान ध्यान दिया गया है। इसे भारतीय परिस्थितियों और यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यात्रियों के आराम को प्राथमिकता देते हुए ट्रेन में एर्गोनॉमिक सीटें, पर्याप्त लेगरूम, एलईडी लाइटिंग, सामान रखने के लिए ओवरहेड रैक और बड़े सामान के लिए अलग स्टैंड दिए जाएंगे। प्रत्येक सीट के पास चौड़ी खिड़कियां और मोबाइल व लैपटॉप चार्ज करने के लिए पावर आउटलेट होंगे। आधुनिक बायो-डाइजेस्टर शौचालय भी इसकी विशेषता होंगे। कोचों के बीच सीलबंद सिंगल-पीस गैंगवे बनाया गया है, जिससे यात्री आसानी से एक कोच से दूसरे कोच में जा सकेंगे।
ट्रेन में प्लेटफॉर्म के बराबर ऊंचाई वाला फर्श, व्हीलचेयर के अनुकूल दरवाजे, विशेष सीटें और सुलभ शौचालय उपलब्ध होंगे। दरवाजों में रिट्रैक्टेबल फुटस्टेप लगाए गए हैं, जो ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच की दूरी कम करने में मदद करेंगे। ब्रेल लिपि में सूचना संकेत भी दिए जाएंगे।
यात्रियों को अंग्रेजी, हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में जानकारी देने के लिए एलसीडी डिस्प्ले, ऑटोमैटिक अनाउंसमेंट, पब्लिक एड्रेस सिस्टम और आपातकालीन टॉक-बैक सुविधा होगी। वाई-फाई आधारित इंफोटेनमेंट सिस्टम के जरिए यात्री पहले से उपलब्ध मनोरंजन सामग्री का लाभ उठा सकेंगे। ट्रेन में 25 केवी, 50 हर्ट्ज एसी ट्रैक्शन प्रणाली और रीजनरेटिव ब्रेकिंग तकनीक का इस्तेमाल होगा, जिससे ब्रेक लगने के दौरान ऊर्जा पुनः प्राप्त की जा सकेगी। रेल मंत्री के अनुसार भारत की स्वदेशी बुलेट ट्रेन केवल तेज रफ्तार का प्रतीक नहीं, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग, ऊर्जा दक्षता, सुरक्षा और यात्री सुविधाओं की दिशा में देश में मील का पत्थर साबित होगी।