ठाणे: दिवाली पर बच्चों में दिखेगा शिवाजी महाराज के स्वराज का गौरव, मुफ्त मिट्टी से बनाएंगे किले

Ulhasnagar Fort Making Competition: दिवाली पर उल्हासनगर में बाल मावलों के लिए लगातार छठे साल मुफ्त मिट्टी वितरण और किला निर्माण प्रतियोगिता आयोजित की गई है। इसका उद्देश्य शिवकालीन विरासत को सहेजना है।
Ulhasnagar Diwali Fort Making Competition Free Clay Distribution
मुफ्त मिट्टी वितरण के लिए रखी मिट्टी(फोटो नवभारत)
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Highlights

  • बाल मावलों को मुफ्त मिट्टी मिलेगी।

  • घर के सामने मिट्टी के किले बनाने की अपील।

  • प्रतियोगिता से बच्चों में इतिहास और रचनात्मकता को बढ़ावा देने की पहल।

Free Clay Distribution In Thane: दिवाली के उत्साह में छत्रपति शिवाजी महाराज के पराक्रम की याद दिलाने वाले मिट्टी के किले बनाने के लिए उल्हासनगर में बाल मावलों को अनोखा मौका मिला है। छत्रपति शिवाजी महाराज का गौरवशाली इतिहास नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए लगातार छठे साल मुफ्त मिट्टी वितरण और किला निर्माण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है।

इस पहल से बच्चों की रचनात्मकता को बढ़ावा देने के साथ-साथ शिवकालीन परंपरा की विरासत को सहेजने की कोशिश की जाएगी। दिवाली के मौके पर घर-घर मिट्टी के किले बनाने की ऐतिहासिक परंपरा को बनाए रखने के लिए शिवसेना के उल्हासनगर पूर्व शहर प्रमुख सचिन कदम की पहल पर विशेष कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

शिवकालीन इतिहास से बच्चों को जोड़ने की पहल

उल्हासनगर कैंप चार के मराठा विभाग 32 स्थित श्री छत्रपति शिवाजी महाराज मैदान में लगातार छठे साल बाल मावलों के लिए मुफ्त मिट्टी उपलब्ध कराई गई है और किला निर्माण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया है।

इस उपक्रम का मुख्य उद्देश्य छत्रपति शिवाजी महाराज के पराक्रम, स्वराज की संकल्पना और महाराष्ट्र के ऐतिहासिक गढ़-किलों के महत्व को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। आयोजकों का मानना है कि मिट्टी के किले बनाने की परंपरा के माध्यम से बच्चों में इतिहास के प्रति रुचि और गर्व की भावना विकसित होगी।

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इसके लिए उल्हासनगर कैंप-4 स्थित श्री छत्रपति शिवाजी महाराज मैदान से बच्चों को मुफ्त मिट्टी उपलब्ध कराई जा रही है। बाल मावलों से अपील की गई है कि वे इस मिट्टी का उपयोग कर अपने घरों के सामने आकर्षक किले बनाएं और दिवाली के उत्सव को ऐतिहासिक विरासत से जोड़ें।

आयोजकों ने की तैयारी

किले बनाते समय कोई भी दिक्कत आने पर जरूरी मार्गदर्शन और सहयोग करने की तैयारी भी आयोजकों ने दिखाई है। दिवाली का आनंद मनाते हुए बच्चों में इतिहास के प्रति गर्व, रचनात्मकता और शिवराय के विचारों की प्रेरणा पैदा हो, इसके लिए यह उपक्रम महत्वपूर्ण साबित होगा।

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शहर के अधिक से अधिक बाल मावलों को इस उपक्रम में शामिल होकर शिवराय के वैभव और महाराष्ट्र राज्य की गढ़-किला परंपरा को सहेजना चाहिए, ऐसी अपील सचिन कदम ने की है।