जानिए कैसे होता है मेयर का चुनाव? कौन होगा मुंबई का महापौर, 11 Feb को खत्म होगा सस्पेंस

Mumbai Mayor Election Process: मुंबई मेयर चुनाव 11 फरवरी को होने की संभावना है। जानें बीएमसी में मेयर चुनने की पूरी प्रक्रिया, आरक्षण के नियम और इस बार के प्रमुख दावेदार।
Mumbai Mayor Election Process
Mumbai Mayor Election प्रतीकात्मक तस्वीर (डिजाइन फोटो)
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BMC Mayor Election Date: बीएमसी के हालिया चुनावों के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मुंबई का अगला 'प्रथम नागरिक' यानी मेयर कौन होगा। 15 जनवरी 2026 को हुए मतदान और 16 जनवरी को आए नतीजों के बाद, अब 11 फरवरी वह तारीख मानी जा रही है जब मेयर पद को लेकर चल रहा सस्पेंस खत्म हो सकता है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका में मेयर का पद केवल सम्मान का नहीं, बल्कि शहर की नीतियों और बजट पर प्रभाव डालने वाला एक महत्वपूर्ण पद है। इस बार के चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जिससे समीकरण काफी दिलचस्प हो गए हैं।

मेयर का चुनाव एक निर्धारित लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से होता है। नगर निगम के सभी नवनिर्वाचित पार्षद मिलकर अपने बीच से एक महापौर और एक उप-महापौर चुनते हैं। इस प्रक्रिया में बहुमत का आंकड़ा सबसे महत्वपूर्ण होता है। 227 सदस्यीय बीएमसी में जादुई आंकड़ा 114 है। मौजूदा स्थिति में महायुति (बीजेपी और शिंदे सेना) के पास बहुमत से अधिक सीटें हैं, जिससे यह लगभग तय है कि मेयर महायुति का ही होगा। हालांकि, अंदरखाने में इस बात को लेकर खींचतान जारी है कि पद किस पार्टी के पास रहेगा।

आरक्षण का गणित और लॉटरी प्रक्रिया

मेयर चुनाव की सबसे पहली और महत्वपूर्ण सीढ़ी 'आरक्षण' है। महाराष्ट्र सरकार लॉटरी के माध्यम से यह तय करती है कि मेयर का पद किस श्रेणी (SC, ST, OBC या सामान्य) और किस लिंग (पुरुष या महिला) के लिए आरक्षित होगा। इस बार मुंबई मेयर का पद 'सामान्य वर्ग (General Category) की महिला' के लिए आरक्षित किया गया है। इसका मतलब है कि किसी भी जाति की महिला पार्षद मेयर बन सकती है। इस आरक्षण ने कई अनुभवी पुरुष पार्षदों को रेस से बाहर कर दिया है और महिला पार्षदों के लिए रास्ते खोल दिए हैं।

कैसे होता है मतदान और नामांकन?

आरक्षण तय होने के बाद, इच्छुक उम्मीदवार अपना नामांकन पत्र दाखिल करते हैं। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में होते हैं, तो निगम की पहली विशेष बैठक में गुप्त मतदान (Secret Ballot) या हाथ उठाकर वोटिंग कराई जाती है। पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) के रूप में आमतौर पर कोंकण संभाग के आयुक्त या निवर्तमान मेयर मौजूद रहते हैं। जिस उम्मीदवार को सबसे अधिक वोट मिलते हैं, उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है। चूंकि बीजेपी के पास 89 और शिंदे सेना के पास 29 पार्षद हैं, इसलिए उनकी राह आसान नजर आ रही है।

11 फरवरी: सस्पेंस और प्रमुख दावेदार

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 11 फरवरी को आधिकारिक रूप से मेयर के नाम पर मुहर लग सकती है। बीजेपी की ओर से राजश्री शिरवाडकर और शीतल गंभीर जैसी अनुभवी महिला पार्षदों के नाम रेस में सबसे आगे हैं। वहीं, एकनाथ शिंदे की शिवसेना भी इस पद पर अपनी दावेदारी जता रही है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) ने भी किशोरी पेडनेकर को अपना ग्रुप लीडर बनाया है, जो विपक्ष की ओर से चुनौती पेश कर सकती हैं। अब देखना यह होगा कि क्या महायुति में 'बड़ी पार्टी' होने के नाते बीजेपी को मेयर पद मिलता है या कोई नया समझौता सामने आता है।

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