

गोकुल में 13-12 सीटों के बावजूद अध्यक्ष चुनाव पर पेच।
4 सरकारी संचालकों को मतदान का अधिकार देने पर विवाद।
समविचारी आघाड़ी ने सरकार के फैसले को अदालत में चुनौती दी।
ED की रिपोर्ट पर हसन मुश्रीफ और उनके बच्चों का मामला बंद।
Satej Patil Hassan Mushrif ED PMLA Relief: कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ (गोकुल) के अध्यक्ष पद की चयन प्रक्रिया में बड़ा सियासी मोड़ आया है। चुनाव में बहुमत पाने के बाद भी सतेज पाटिल की समविचारी आघाड़ी आवश्यक कोरम के पेंच में फंस गई है, दूसरी तरफ मतदान के अधिकार के साथ 4 संचालकों की नियुक्ति के निर्णय से सरकार की किरकिरी के बीच महायुति नेता हसन मुश्रीफ ने पाटिल से डेडलॉक खत्म करने का फॉर्मूला मांगा है। गोकुल में 25 में से 13 सीटें समविचारी आघाड़ी और 12 सीटें महायुति के पास हैं।
14 के अनिवार्य कोरम के अभाव में पैदा हुई बाधा दूर करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने 5 शासन-नियुक्त संचालकों में से 4 को मतदान का अधिकार देने का निर्णय लिया है। इस कदम से महायुति के लिए अध्यक्ष पद की राह आसान नजर आ रही है।
महायुति के इस अध्यादेश के खिलाफ समविचारी आघाड़ी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है अधिवक्ता श्रीकृष्ण गणबावले के अनुसार, पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई ने भी चेतावनी दी है कि स्वीकृत संचालकों को मतदान का अधिकार देना असंवैधानिक और मनमाना कदम ठहराया जा सकता है।
एक विशेष अदालत ने मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी नेता हसन मुश्रीफ और उनके बच्चों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामला बंद कर दिया है। विशेष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय की उस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया जिसमें मूल अपराध को खारिज किए जाने के बाद मामला बंद करने की मांग की गई थी विशेष न्यायालय के न्यायाधीश एस.वी. सहारे ने ईडी की रिपोर्ट स्वीकार करते हुए मुश्रीफ और उनके बच्चों के खिलाफ दायर वित्तीय अनियमितताओं के मामले को रद्द कर दिया
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि चूंकि मूल मामला रद्द कर दिया गया है, इसलिए पीएमएलए के तहत दायर मामला जारी नहीं रखा जा सकता। इसके अलावा, न्यायालय ने 4 अप्रैल को दर्ज अपराध से संबंधित मामले को बंद करने और मामले से संबंधित दस्तावेजों को सुधार विभाग के अधिकारियों को लौटाने का आदेश दिया। पुणे शहर स्थित कंपनी महालेखाकार द्वारा दायर शिकायत के आधार पर वर्ष 2022 में 'कंपनी अधिनियम' के उल्लंघन में वित्तीय अनियमितताओं की जांच शुरू की गई थी।
हसन मुश्रीफ ने स्पष्ट किया कि तीन लगातार बैठके स्थगित होने पर संघ पर प्रशासक की नियुक्त्ति का नियम है।
लोकतंत्र और संस्था को बचाने के लिए शासन-नियुक्त संचालक ही एकमात्र विकल्प थे।
साथ ही उन्होंने चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर हुई बदनामी और अनर्गल प्रचार पर दुख जताया।