चारे की कमी दूर करने के लिए सरकार का बड़ा फैसला, 304 तालुकों में किसानों को मिलेगी जलाशयों की जमीन

Maharashtra Drought: महाराष्ट्र के 304 सूखाग्रस्त तालुकाओं में चारा संकट दूर करने के लिए जलाशयों की गाद युक्त जमीन पट्टे पर दी जाएगी। मंत्री संजय राठौड़ ने शर्तों का ब्योरा जारी किया।
In 304 drought-affected talukas of Maharashtra, land will be made available on lease for the cultivation of fodder
प्रतीकात्मक तस्वीरसोर्स- सोशल मीडिया
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Highlights

  • महाराष्ट्र के 304 सूखाग्रस्त तालुकों में चारे की खेती के लिए जमीन पट्टे पर मिलेगी।

  • मक्का, ज्वार और बाजरा जैसी चारा फसलें उगा सकेंगे किसान।

  • 31 मई 2027 तक जमीन लौटानी होगी।

  • नियम तोड़ने पर पट्टा रद्द किया जाएगा।

Maharashtra Drought Relief: महाराष्ट्र में सूखे की मार झेल रहे किसानों और पशुपालकों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। राज्य के 304 सूखाग्रस्त तालुकों में पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से जलाशयों और तालाबों की खेती योग्य गादयुक्त जमीन पट्टे पर दी जाएगी। किसान और पशुपालक इस जमीन पर मक्का, ज्वार, बाजरा, बरसीम और ओट जैसी चारा फसलें उगा सकेंगे। मृदा एवं जल संरक्षण मंत्री संजय राठौड़ ने इस निर्णय की जानकारी दी है।

इन जलाशयों की जमीन पर कर सकेंगे खेती

मंत्री संजय राठौड़ के अनुसार, यह योजना लघु सिंचाई तालाबों, जल भंडारण तालाबों, रिसाव तालाबों और गांव के तालाबों की खेती योग्य जमीन पर लागू होगी। जलाशयों की खाली जमीन का उपयोग चारा उत्पादन के लिए किया जाएगा। हालांकि, पेयजल योजनाओं और टैंकरों के लिए आरक्षित जलस्रोतों में पीने के पानी की उपलब्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

जमीन की पहचान और उपलब्धता के लिए राजस्व, कृषि, पशुपालन तथा मृदा एवं जल संरक्षण विभाग के अधिकारी संयुक्त सर्वेक्षण करेंगे। जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति जमीन के आवंटन और लाभार्थियों के चयन को मंजूरी देगी।

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मक्का और ज्वार की खेती को प्राथमिकता

महाराष्ट्र सरकार ने इस जमीन पर चारा फसलों की खेती के लिए कुछ शर्तें भी निर्धारित की हैं। मक्का और ज्वार की खेती को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा बाजरा, बरसीम और ओट जैसी फसलें भी उगाई जा सकेंगी। हालांकि, गन्ना, फल, बहुवर्षीय फसलें, खाद्यान्न और नकदी फसलों की खेती की अनुमति नहीं होगी। रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल पर भी निर्धारित प्रतिबंध लागू रहेंगे।

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31 मई 2027 तक लौटानी होगी जमीन

योजना के तहत जमीन लेने वाले किसानों और लाभार्थियों को 31 मई 2027 तक फसल की कटाई पूरी करके जमीन संबंधित विभाग को वापस करनी होगी। इस दौरान जमीन पर कुआं, बोरवेल, निर्माण, बाड़ या गड्ढे बनाने की अनुमति नहीं होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर आवंटित पट्टा रद्द किया जा सकता है।

तहसीलदार कार्यालय में कर सकेंगे आवेदन

इस योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसान और संस्थाएं जरूरी दस्तावेजों के साथ तहसीलदार कार्यालय में आवेदन कर सकेंगे। आवेदन प्रक्रिया और जमीन आवंटन से जुड़ी जानकारी कम से कम 15 दिन पहले सार्वजनिक की जाएगी। सरकार के इस फैसले से सूखाग्रस्त क्षेत्रों में चारा उत्पादन बढ़ाने और पशुपालकों को राहत मिलने की उम्मीद है।