पराग शाह (सौजन्य-नवभारत)
मुंबई: आने वाले वर्षों में घाटकोपर भीड़-भाड़ वाला क्षेत्र बन जाएगा, जिससे ट्रैफिक जाम, पार्किंग और बुनियादी समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है। अभी तक घाटकोपर में कोई नई सड़क का निर्माण नही हुआ है और पुरानी सड़कों से इंक्रोचमेंट भी नही हटा है। लेकिन ऊंचे-ऊंचे टावरों का निर्माण तेजी से चल रहा है।
स्लम में रहने वाले लोग इमारतों में चले जाएंगे, पुरानी इमारतों की जगह टावर बन रहे है, आवासीय इलाकों में निवासियों की संख्या कई गुना बढ़ जाएंगे जिससे पूरे घाटकोपर में ट्रैफिक जाम को लेकर बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। घाटकोपर के पूर्व के विधायक पराग शाह का कहना है कि यह केवल घाटकोपर ही नहीं पूरे सहर की समस्या है जब तक एफएसआई कंट्रोल नही होगी तब तक समस्या खत्म नही होगी।
बता दें, कि घाटकोपर में पुरानी इमारतों की जगह टावर बन रहे है, तो स्लम में भी बड़े-बड़े उच्च रिहायशी इमारतों का निर्माण तेजी से शुरू है। आने वाले कुछ वर्षों में क्षेत्र का तो विकास होगा ही, साथ ही लोगों के रहन-सहन में भी परिवर्तन देखने को मिलेगा, बड़ी-बड़ी इमारतों या टावर बन जाने के बाद पार्किंग की समस्या भी खड़ी हो जाएगी। जिससे छुटकारा पाना आसान नहीं होगा। अभी भी घाटकोपर की सड़कों पर चलना मुश्किल है जगह-जगह जाम लगा रहता फुटपाथ पर अतिक्रमण हुआ है।
घाटकोपर पूर्व में बड़े-बड़े कंस्ट्रक्शन का काम तेज गति से चल रहा है। पंतनगर में म्हाडा हाउसिंग बोर्ड की 200 इमारतों में से नई हाउसिंग पॉलसी के तहत 150 इमारतों का पुनर्विकास होना है। पुरानी इमारतो में रहने वाले लोगों को 200 स्क्वायर फिट का घर है। लेकिन, नई पॉलिसी के तहत अब इन निवासियों को 506 स्क्वायर फिट का मकान मिलेगा।
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नायडू कॉलोनी में 2 हजार 5 सौ झोपड़ों का स्लम है, 350 घर ट्रांजिस्ट कैम्प में है, पंचगंगा, सिध्दरामेश्वर, माण्डलेश्वर, ममता गृहनिर्माण सोसायटी का समावेश है यहां पर रिहैब के अलावा तकरीबन 12 लाख स्क्वायर फिट का सेलेबल रिडेवलपमेंट हो रहा है, नायडू कॉलोनी में 25 लाख स्क्वायर फिट का अडानी ग्रुप के तहत डेवलपमेन्ट हो रहा है। गारोड़िया नगर में 210 पुरानी इमारतों का नए डीपी प्लान के तहत पुनर्निर्माण होगा। पिछले 70 साल में 1 एफएसआई के अनुपात से इमारते बनी थी। अब नए निर्माण से क्षेत्र की जनसंख्या काफी बढ़ जाएगी।
घाटकोपर पूर्व के विधायक पराग शाह ने कहा, यह घाटकोपर ही नहीं पूरे मुंबई शहर का मसला है। जब तक एफएसआई पर कंट्रोल नहीं होगा तब तक यह समस्याएं खत्म नहीं होगी। एवीए के अंतर्गत हाइट रिस्ट्रिक्शन है वहां पर एफएसआई रिस्ट्रिक्शन जरूरी है। सरकार को विचार करना चाहिए। पूरे शहर में बड़े स्तर पर कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है, पुरानी इमारतें टावर, स्लम एसआरए में तबदील हो रहे है। कुछ पुरानी इमारतों का विकास नई पॉलसी डीसीआर के तहत शुरू कर दिया गया है।
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