Mumbai News: रेशम उद्योग से विदर्भ के किसान आत्मनिर्भर, रेशम खेती के लिए सरकार का समर्थन
विदर्भ के किसानों को रेशम उद्योग से समृद्ध बनाने के लिए राज्य सरकार केंद्र सरकार के सहयोग से विभिन्न योजनाओं को लागू कर रही है।
- Written By: आंचल लोखंडे
रेशम उद्योग से विदर्भ के किसान आत्मनिर्भर। (सौजन्यः सोशल मीडिया)
मुंबई: लगातार फसल खराब होने, अनियमित मौसम और सीमित मिट्टी की उर्वरता के कारण पारंपरिक खेती जोखिम भरी हो जाती है। ऐसे में कम पानी की आवश्यकता वाली शहतूत की खेती किसानों के लिए लाभकारी और आर्थिक रूप से टिकाऊ खेती का बेहतर विकल्प बन रही है। विदर्भ के किसानों को रेशम उद्योग से समृद्ध बनाने के लिए राज्य सरकार केंद्र सरकार के सहयोग से विभिन्न योजनाओं को लागू कर रही है। इससे विदर्भ के किसान आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रेशम खेती को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को केंद्र सरकार से इस योजना के लिए धनराशि जल्द से जल्द प्राप्त करने का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी दिए हैं। इसके अलावा, निजी कंपनियों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) निधि के माध्यम से शहतूत और टसर रेशम उद्योग के एकीकृत विकास की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए उन जिलों में रेशम उद्योग कार्यालय स्थापित करने की योजना बनाई गई है, जहां अभी तक ये उपलब्ध नहीं हैं। पुणे स्थित बाएफ संस्थान इस कार्य में सरकार की सहायता कर रहा है।
कपड़ा निर्माण तक मूल्यवर्धित आपूर्ति श्रृंखला
बाएफ ने रेशम संचालनालय की सहायता के लिए शहतूत की खेती से लेकर कपड़ा निर्माण तक मूल्यवर्धित आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने की योजना प्रस्तुत की है। इसमें शहतूत की खेती, अंडे से कोष (ककून) उत्पादन, कोषोत्तर प्रक्रिया उद्योग को बढ़ावा देना और समूह आधारित विकास शामिल है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ाने और रेशम उद्योग को प्रोत्साहन देने की योजना बनाई गई है। इस मॉडल को देखने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल ने पुणे के उरुली कांचन का दौरा भी किया।
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रेशम और वस्त्रोद्योग के विस्तार की योजना
रेशम और वस्त्रोद्योग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार से आवश्यक निधि प्राप्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वन विभाग शहतूत, ऐन और अर्जुन वृक्षारोपण में सहायता कर रहा है। जोमैटो और जेप्टो जैसी कंपनियां अपने CSR निधि के माध्यम से आदिवासी जिलों में इन वृक्षों के रोपण को बढ़ावा दे रही हैं। इसके लिए एक रणनीतिक कार्य योजना तैयार की जा रही है।
टसर उद्योग में रेशम कीट पालन करते समय किसानों को आने वाली कठिनाइयों के समाधान के लिए संबंधित जिलों के वन अधिकारियों और प्रधान मुख्य वनसंरक्षक को तत्काल सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया गया है। यदि अतिरिक्त निधि की आवश्यकता हो, तो मुख्यमंत्री कार्यालय से समन्वय कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। महिला और आदिवासी समुदायों पर विशेष ध्यान देते हुए अगले 5 वर्षों में 10,000 लाभार्थियों के लिए एक समग्र कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
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जिला वार्षिक योजनाओं के तहत रेशम खेती को बढ़ावा
राज्य में रेशम किसानों को 75% सब्सिडी पर रेशम कीट के अंडे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। साथ ही, रेशम उद्योग में नवीनतम प्रयोगों का अध्ययन करने के लिए किसानों के लिए अध्ययन दौरे आयोजित किए जा रहे हैं। 15 दिनों का तकनीकी प्रशिक्षण भी वजीफे के साथ प्रदान किया जा रहा है। इसके अलावा, किसानों को उत्पादन आधारित प्रोत्साहन और आधुनिक मशीनों के लिए सब्सिडी दी जा रही है:
रेशम कोष उत्पादन पर प्रोत्साहन अनुदान
रेशम धागा उत्पादन के लिए वित्तीय सहायता, जिससे ग्रामीण रोजगार बढ़ेगा। आधुनिक यंत्रों पर सब्सिडी, जैसे मल्टी-एंड रेलिंग यूनिट (₹100 प्रति किलो), ऑटोमेटिक रेलिंग यूनिट (₹150 प्रति किलो), और टसर रीलींग यूनिट (₹100 प्रति किलो)। राज्य सरकार, आधुनिक तकनीक और उचित मार्गदर्शन के माध्यम से ग्रामीण और सूखाग्रस्त क्षेत्रों के किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
